संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने कहा है कि भारत के पास 41 देशों में कोई स्थायी मिशन नहीं है, जिससे कूटनीतिक और रणनीतिक हित प्रभावित हो रहे हैं। समिति ने विदेश मंत्रालय के बजट में गिरावट पर चिंता जताते हुए अगले वित्त वर्ष में कम से कम 20 प्रतिशत बढ़ोतरी की सिफारिश की है।
संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने कहा है कि भारत के पास अब भी 41 देशों में कोई स्थायी राजनयिक मिशन या पोस्ट नहीं है। समिति के मुताबिक इससे इन देशों के साथ भारत के कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के अवसर सीमित हो रहे हैं।
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट बृहस्पतिवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में विदेश मंत्रालय के 2025-26 के अनुदान मांगों पर सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की समीक्षा की गई है।
बजट में गिरावट पर जताई चिंता
समिति ने माना कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और देश बहुपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा, विकास साझेदारी, जलवायु परिवर्तन और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सक्रिय है। हालांकि समिति ने विदेश मंत्रालय के बजट में गिरावट पर चिंता जताई। रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में मंत्रालय का बजट कुल सरकारी बजट का 0.46 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर 0.41 प्रतिशत रह गया है। समिति ने अगले वित्त वर्ष में विदेश मंत्रालय के बजट में कम से कम 20 प्रतिशत बढ़ोतरी की सिफारिश की है।
जापान, अमेरिका, ब्रिटेन में पांच नए मिशन शुरू
समिति ने बताया कि जून 2025 तक ब्रिटेन, जापान और अमेरिका में पांच नए मिशन शुरू किए गए हैं, लेकिन 41 देशों में अब भी कोई प्रगति नहीं हुई है। इन देशों में भारत के कामकाज को पड़ोसी मिशनों या मानद कौंसलों के जरिये संभाला जा रहा है। समिति ने सरकार से यूरोप, लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई क्षेत्र में स्वीकृत नए मिशनों को जल्द शुरू करने का आग्रह किया है।