देश में हवाई यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच एक संसदीय समिति ने सोमवार को सरकार से हवाईअड्डों के लिए विशेष सुरक्षा एजेंसी स्थापित करने की व्यवहार्यता पर विचार करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा, समिति ने हवाई यात्रियों के उपद्रवी व्यवहार के मामलों में पुलिस और अदालतों से निपटने के लिए एक विशेष विंग गठित करने का भी प्रस्ताव दिया है। समिति ने विमानन नियामक डीजीसीए से ऐसी घटनाओं के लिए शून्य-सहिष्णुता नीति लागू करने का आग्रह किया है।
परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर विभाग-संबंधित संसद की स्थायी समिति ने संसद में सोमवार को पेश अपनी रिपोर्ट में ये सिफारिशें की हैं। समिति ने कहा कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की कुल 353 इकाइयों में से 66 इकाइयां हवाईअड्डों पर तैनात हैं और जिस तेजी से नागरिक उड्डयन क्षेत्र के बढ़ने की उम्मीद है उससे हवाईअड्डों पर सुरक्षा प्रदान करने में लगे कर्मचारियों की जरूरत भी बढ़ेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसलिए, समिति सिफारिश करती है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय गृह मंत्रालय के परामर्श से केवल हवाईअड्डों के लिए एक विशेष सुरक्षा एजेंसी स्थापित करने की व्यवहार्यता की जांच कर सकता है।
देश में इस समय 148 हवाईअड्डे परिचालन में हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या जून में एक साल पहले की तुलना में 18.78 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.25 करोड़ हो गई है। सीआईएसएफ की तैनाती की लागत (सीओडी) का भुगतान संबंधित हवाईअड्डा प्रबंधन द्वारा किया जाता है। 2019 में, उड्डयन मंत्रालय ने राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा शुल्क ट्रस्ट (एनएएसएफटी) की स्थापना की थी, जो सुरक्षा एजेंसी को तैनाती लागत के लिए धन भेजता है।
संसदीय समिति ने कहा कि सीआईएसएफ का सीओडी बकाया 4,707 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा, 16 संयुक्त उद्यम हवाई अड्डों का कुल सीओडी बकाया 64 प्रतिशत से अधिक है।