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Indian Army: संसदीय समिति ने सेना के पूंजीगत बजट को बढ़ाने की सिफारिश की, चीन-पाक से चुनौतियों का दिया हवाला

Wed, 22 Mar 2023 01:03 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

संसदीय समिति ने रक्षा मंत्रालय द्वारा सैन्य प्लेटफार्मों के स्वदेशीकरण की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में जो संविदा जारी किए जाएंगे उसमें 100 फीसदी भारतीय कंपनियों की भागीदारी होगी।
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भारतीय थलसेना (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : PTI
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विस्तार
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एक संसदीय पैनल ने मंगलवार को भारतीय सेना के पूंजीगत बजट बढ़ाने की सिफारिश की। संसदीय पैनल ने पाकिस्तान और चीन के परोक्ष संदर्भ में कहा कि भारतीय सेना को दो "शत्रुतापूर्ण" पड़ोसियों की चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी निवारक क्षमता बढ़ाने की सुविधा के लिए पूंजीगत बजट को बढ़ाया जाना चाहिए।

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समिति ने रक्षा मंत्रालय द्वारा सैन्य प्लेटफार्मों के स्वदेशीकरण की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में जो संविदा (Contract) जारी किए जाएंगे उसमें 100 फीसदी भारतीय कंपनियों की भागीदारी होगी। सेना के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए संसदीय स्थायी समिति ने जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित सीमा पार आतंकवाद के एक स्पष्ट संदर्भ में छद्म युद्धों (Proxy Wars) का हवाला दिया।

समिति का विचार है कि सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित धनराशि हमेशा वृद्धिशील होनी चाहिए। समिति ने यह भी इच्छा जताई कि आधुनिकीकरण या पूंजीगत बजट के तहत प्रतिबद्ध देनदारियों और नई योजनाओं के लिए एक अलग आवंटन होना चाहिए। संसदीय पैनल की रिपोर्ट मंगलवार को लोकसभा में पेश की गई।
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समिति ने पाकिस्तान और चीन के परोक्ष संदर्भ में कहा कि हमारा खर्च हमारे पड़ोसियों के रक्षा खर्च में वृद्धि के अनुपात में होना चाहिए। इसलिए समिति ने सिफारिश की है कि कम से कम दो शत्रुतापूर्ण पड़ोसियों से निपटने के लिए अपनी निवारक क्षमता बढ़ाने के लिए सेना के पूंजीगत बजट को बढ़ाया जाना चाहिए। समिति ने नोट किया कि 2023-24 के बजट में नौसेना के लिए पूंजी खर्च 52,804.75 करोड़ रुपये अनुमानित है। समिति ने कहा कि इस वर्ष का आवंटन नौसेना के लिए व्यावहारिक और सहायक है क्योंकि मंत्रालय ने वास्तव में अनुमानित राशि के समान ही राशि आवंटित किया है। हालांकि, यह अनुमान वर्ष 2022-23 में किए गए अनुमान से 14,818.21 करोड़ रुपये कम है।

समिति ने सिफारिश की कि अगले वर्ष से महंगाई को ध्यान में रखते हुए शुद्ध बजट का एक अलग विवरण प्रदान किया जाए। यह देखते हुए कि यह आर्थिक सिद्धांत के सभी पहलुओं में एक आवर्ती और अपरिहार्य घटना है जो नौसेना पर भी लागू होती है।

संसदीय समिति ने की राजनयिकों की संख्या और विदेश मंत्रालय का बजट बढ़ाने की सिफारिश
विदेश मंत्रालय को विदेशों में अपने दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी चाहिए और संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों में भारत के बढ़ते वैश्विक हितों और विदेश नीति के क्षेत्र में गहन बदलाव के अनुरूप मिशन स्थापित करना चाहिए। एक संसदीय समिति की रिपोर्ट में मंगलवार को यह सिफारिश की गई।

विदेश मामलों की समिति ने भारत को दुनिया में एक प्रभावशाली राष्ट्र बनाने के चुनौतीपूर्ण जनादेश के मद्देनजर सरकार के कुल वार्षिक बजट का कम से कम एक प्रतिशत विदेश मंत्रालय को आवंटित करने की भी सिफारिश की। समिति ने कहा कि विदेश मंत्रालय सबसे कम वित्त पोषित केंद्रीय मंत्रालयों में से एक है क्योंकि इसका संशोधित बजट 2020-21 से सरकार के कुल बजटीय आवंटन का लगभग 0.4 प्रतिशत है।

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