गृह मामलों पर बनी संसदीय समिति ने देश में पुलिस की खराब होती छवि को लेकर सख्त टिप्पणियां की हैं। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कहा है कि देशभर में लोगों के बीच पुलिस की छवि नकारात्मक है और आम लोगों को कई बार पुलिसवाले असंवेदनशील लगते हैं।
समिति ने कहा कि पुलिस की छवि खराब होने की वजह यह भी है कि कई पुलिसकर्मी, जिनमें आईपीएस अफसर शामिल हैं के खिलाफ भ्रष्टाचार तक की शिकायतें आ चुकी हैं। संसदीय समिति ने इस बात पर नाराजगी भी जाहिर की कि पुलिस की सार्वजनिक छवि पूरे देश में नकारात्मक हो रही है। बताया गया है कि यह रिपोर्ट इसी हफ्ते संसद को सौंपी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिसवालों के आम जनता के प्रति इस तरह के बर्ताव की कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन उनके सही तरह से प्रशिक्षण के जरिए उनके बर्ताव को बेहतर किया जा सकता है। कमेटी ने कहा कि पुलिसकर्मियों के बर्ताव में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उनमें हकदारी आधारित नजरिए की जगह अधिकार पर आधारित नजरिया लाना होगा।
कमेटी ने संसद को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में प्रस्ताव दिया है कि पुलिस के प्रशिक्षण संस्थानों में पुलिसकर्मियों को व्यवहार कुशल बनाने की कोशिश भी की जानी चाहिए। यही प्रशिक्षुओं की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि पुलिस की छवि को सकारात्मक किया जा सके।
पुलिस के आधुनिकीकरण पर खर्च होंगे 26,275 करोड़ रुपये
- केंद्र सरकार पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए 26,275 करोड़ रुपये खर्च करेगी। सरकार ने वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक के लिए पुलिस फोर्स आधुनिकीकीकरण (एमपीएफ) नामक अंब्रेला स्कीम को जारी रखने को मंजूरी दी है। यह पैसा अगले पांच साल में देश के सभी हिस्सों में खर्च होगा।
- केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, इसमें जम्मू-कश्मीर व पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा पर खर्च, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नई बटालियन तैयार करने और नई फोरेंसिक लैब व जांच के उपकरण विकसित करने जैसे काम शामिल हैं। सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस को आधुनिक बनाने और कार्यशैली में सुधार पर भी काम होगा।
- आंतरिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था, पुलिस द्वारा आधुनिक तकनीक अपनाने, राज्यों में मादक पदार्थों के नियंत्रण पर काम कर रही एजेंसियों और आपराधिक न्यायिक प्रणाली को पुख्ता रखने के लिए मजबूत फोरेंसिक सेटअप तैयार करने में पर भी पैसा खर्च किया जाएगा।