अडानी मामले, मणिपुर की स्थिति और संभल हिंसा पर चर्चा की विपक्ष की मांग के बीच संसद में हो रहे व्यवधान पर राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का बयान सामने आया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि संसद में व्यवधान एक तरीका नहीं बल्कि एक बीमारी है। उन्होंने सदस्यों से "पारंपरिक विचारशील चर्चा" में शामिल होने और सार्थक संवाद की भावना अपनाने का आग्रह किया।
'नियमों का उल्लघन सदन को अपवित्र करने जैसा'
संसद उत्पादक चर्चा के लिए एक मंच-धनखड़
धनखड़ ने कहा कि संसद उत्पादक चर्चा के लिए एक मंच है और वह सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए समय देंगे। उन्होंने कहा मैं इस सदन को अप्रासंगिक नहीं होने दूंगा। हमें उन लोगों का सम्मान करना चाहिए जिन्होंने हमें यह संविधान दिया।
बता दें कि पिछले तीन दिनों से संसद में कोई सार्थक कामकाज नहीं हो पाया है और धनखड़ ने पहले कहा था कि संसद में नियमों का पालन करना सभी का कर्तव्य है। क्योंकि इसका उल्लंघन लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र करने जैसा है।