समिति ने सरकार को आगाह किया है कि घाटे में चल रहे सरकारी क्षेत्र के दो उपक्रमों अर्थात एमटीएनएल और बीएसएनएल के विलय के संदर्भ में कोई भी फैसला करने से पहले सभी कारकों का विश्लेषण करे। समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र के ये उपक्रम ऐसे बाजार ढांचे के तहत काम कर रहे हैं जहां इन्हें निजी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र के उपक्रम सरकारी राजकोष से भारी सहायता से चल रहे हैं लेकिन एक तथ्य यह भी है कि सरकार की ओर से निर्णय लेने में विलंब के कारण इन उपक्रमों में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गयी और उत्पादन में कमी आयी। समिति ने कहा कि सरकार को विलंब को रोकने के लिए उपाय करना चाहिए।
समिति ने यह भी कहा कि आज के लगातार बदलते परिदृश्य को देखते हुए तत्काल निर्णय लेने की क्षमता बहुत अहम हो जाती है। ऐसे में उसकी राय है कि सीपीएसयू के निदेशक मंडल में विशेषज्ञों को शामिल कर उसके निर्णय क्षमता प्रबंधन और प्रशासन की गुणवत्ता में वृद्धि की जानी चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति यह महसूस करती है कि जब तक सीपीएसयू को अपेक्षित स्वतंत्रता नहीं दी जाती, वे बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं हो सकेंगे। कई सीपीएसयू में प्रयोग की जा रही प्रौद्योगिकी अप्रचलित हो गयी है। इस वजह से एचएमटी सहित कई कंपनियों ने अपनी प्रासंगिकता खो दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नीति आयोग ने अपने एक बयान में उल्लेख किया था कि जहां पर प्रतिस्पर्धी बाजार पहले से ही स्थापित हो चुके हैं, वहां सरकार को सेवाओं और सामान के विनिर्माण एवं उत्पादन में कार्यरत नहीं होना चाहिए। समिति ने कहा कि वह नीति आयोग के सुझाव से सहमत है और यह मानती है कि सरकार को विनियामक या सुविधादाता के रूप में कार्य करना चाहिए।