जेपीसी का कार्यकाल अगले साल बजट सत्र के आखिरी दिन तक बढ़ाए जाने के बाद समिति की पहली बैठक हुई। अध्यक्ष पाल ने बताया कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय के अधिकारी समिति के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने समिति के विभिन्न सदस्यों की तरफ से पूछे गए सवालों के जवाब पेश किए।
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने विवादित संपत्तियों को लेकर सख्ती जताई है। गुरुवार को हुई जेपीसी बैठक में तय किया गया कि विवादित संपत्तियों के मामले में राज्यों से ब्योरा मांगा जाए। इसे लेकर जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि वक्फ की विवादित संपत्तियों का ब्योरा मुहैया कराने के लिए राज्यों को पत्र लिखा जा चुका है। अगर जरूरत पड़ी तो राज्यों के मुख्य सचिवों को समिति के समक्ष पेश होने को कहा जा सकता है।
विज्ञापन
जेपीसी का कार्यकाल अगले साल बजट सत्र के आखिरी दिन तक बढ़ाए जाने के बाद समिति की पहली बैठक हुई। अध्यक्ष पाल ने बताया कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय के अधिकारी समिति के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने समिति के विभिन्न सदस्यों की तरफ से पूछे गए सवालों के जवाब पेश किए। पाल ने बताया कि ये जवाब 887 पन्नों के हैं। अगले कुछ दिन इनकी जांच की जाएगी।
उन्होंने बताया कि अगली बैठक 11-12 दिसंबर को होगी। समिति के एक सदस्य ने दावा किया कि मंत्रालयों की तरफ से पेश किए गए जवाब काफी उलझाने वाले हैं। विपक्ष के सदस्यों की तरफ से अगले कुछ दिनों में उन पर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जेपीसी बैठक में वक्फ की विवादित संपत्तियों का मुद्दा भी उठा, जिसमें हाल ही में राज्य सरकारों को ब्योरा देने के लिए पत्र भेजा जा चुका है।
विज्ञापन
सच्चर समिति की रिपोर्ट पर मांगी गई जानकारी
पाल ने बताया कि सच्चर समिति ने अपनी रिपोर्ट में विभिन्न राज्यों में वक्फ की कई संपत्तियों पर राज्य सरकार या उसके विभाग का अनधिकृत कब्जा होने की जानकारी दी थी। राज्यों से इसी पर मौजूदा स्थिति पर अपडेट जानकारी मांगी गई है। सच्चर समिति को 2005-06 में विभिन्न राज्य वक्फ बोर्डों ने बताया था कि दिल्ली में 316, राजस्थान में 60 और कर्नाटक में 42 ऐसी विवादित संपत्तियां हैं। वहीं मध्य प्रदेश में 53, उत्तर प्रदेश में 60 और ओडिशा में 53 ऐसी संपत्तियां होने का दावा किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
लोकसभा में आठ अगस्त को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने 'वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024' पेश किया था। इसके साथ ही इससे जुड़े निष्क्रिय हो चुके पुराने अधिनियम को कागजों से हटाने के लिए 'मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024' को भी पेश किया गया था। नए विधेयक का नाम एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम होगा। अंग्रेजी में यूनिफाइड वर्क मैनेजमेंट एंपावरमेंट एफिशिएंट एंड डेवलपमेंट यानी 'उम्मीद'। इस विधेयक का विपक्ष ने पुरजोप विरोध किया था। उसके बाद नौ अगस्त को इसे आगे की चर्चा के लिए संसद की संयुक्त संसदीय समिति को भेज दिया गया था। वक्फ संशोधन विधेयक के लिए गठित समिति का कार्यकाल बजट सत्र 2025 के आखिरी दिन तक बढ़ाया गया है। लोकसभा ने इस प्रस्ताव पर मंजूरी दी थी।