संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र को तय कार्यक्रम के मुताबिक कल यानी 13 दिसंबर को समाप्त होना था। हालांकि, इसे एक दिन पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा। सत्र के दौरान राज्यसभा में सिर्फ 47.9 फीसदी काम हो पाया। सभापति वेंकैया नायडू ने इस पर नाराजगी जाहिर की। नायडू ने सांसदों को सामूहिक रूप से चिंतन करने और व्यक्तिगत आत्मनिरीक्षण करने को कहा।
नायडू ने कहा कि सांसद सामूहिक रूप से चिंतन और व्यक्तिगत रूप से आत्मनिरीक्षण करें कि सत्र किस तरह से गुजरा है। नायडू ने कहा क सदन का शीतकालीन सत्र आज समाप्त हो रहा है। मुझे आपको यह बताते हुए खुशी नहीं हो रही है कि सदन ने अपनी क्षमता से बहुत कम काम किया है। मैं आप सभी से सामूहिक और व्यक्तिगत रूप से चिंतन करने और आत्मनिरीक्षण करने का आग्रह करता हूं कि क्या यह सत्र अलग और बेहतर हो सकता था।
उन्होंने कहा मैं इस सत्र को लेकर विस्तार से नहीं बोलना चाहता। इसकी वजह यह है कि ऐसा करने पर मुझे एक बहुत ही आलोचनात्मक दृष्टिकोण दिख सकता है। सदन के कामकाज को लेकर आंकड़ें जारी कर दिए जाएंगे। राज्यसभा की 18 बैठकों में सिर्फ 47.90 फीसदी ही काम हो पाया। कुल निर्धारित बैठकों के 95 घंटे 6 मिनट में से सदन में केवल 45 घंटे 34 मिनट के लिए काम हुआ। बीते चार साल में नायडू की अध्यक्षता वाले 12 सत्रों में सबसे कम कामकाज के मामले में ये पांचवें नंबर पर रहा।
आधे से ज्यादा समय बर्बाद हुआ
इस सत्र में व्यवधानों और जबरन स्थगन की वजह से 49 घंटे 32 मिनट बर्बाद हो गए। इस तरह उपलब्ध समय का 52.08 फीसदी हिस्सा बर्बाद हो गया। इसमें प्रश्नकाल सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। इसके अलावा राज्यसभा ने इस सत्र में 10 बिल पास भी किए।