फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जलियांवाला बाग नेशनल मेमोरियल बिल को राज्यसभा से मंजूरी, ट्रस्ट के सदस्य नहीं होंगे कांग्रेस अध्यक्ष

Wed, 20 Nov 2019 05:06 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
Rajya Sabha(File Photo) - फोटो : ANI
विज्ञापन

संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्यसभा से भी जलियांवाला बाग नेशनल मेमोरियल संशोधन बिल को मंजूरी मिल गई है। अब कांग्रेस अध्यक्ष इस ट्रस्ट के सदस्य नहीं रह पाएंगे, बल्कि लोकसभा में नेता विपक्ष इस ट्रस्ट का हिस्सा होंगे। मालूम हो कि सरकार ने मॉनसून सत्र के दौरान इस बिल को लोकसभा में पारित कराया था।

विज्ञापन


जलियांवाला बाग नेशनल मेमोरियल ऐक्ट, 1951 के तहत मेमोरियल के निर्माण और प्रबंधन का अधिकार ट्रस्ट को है। इसके अलावा इस एक्ट में ट्रस्टियों के चयन और उनके कार्यकाल के बारे में भी बताया गया है। अब तक कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष इस मेमोरियल ट्रस्ट के पदेन सदस्य हुआ करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। 

फिलहाल इस ट्रस्ट के प्रमुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। पीएम मोदी के अलावा इस ट्रस्ट में कांग्रेस नेता  राहुल गांधी, कला—संस्कृृति मंत्री और लोकसभा में नेता विपक्ष शामिल हैं। इसके अलावा पंजाब के सीएम भी इस ट्रस्ट के सदस्य हैं। 
विज्ञापन


बिल में हुए संशोधन के बाद नए प्रावधानों में केंद्र सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह ट्रस्ट के किसी सदस्य को उसका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटा सकती है। इससे पहले साल 2006 में यूपीए सरकार ने ट्रस्ट के सदस्यों को पांच साल के तय कार्यकाल का प्रावधान किया था। 

विज्ञापन

कांग्रेस सांसद बोले, हमारी पहल पर हुआ ट्रस्ट का गठन

जलियांवाला बाग नेशनल मेमोरियल (संशोधन) बिल पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने कांग्रेस अध्यक्ष को ट्रस्ट के स्थायी सदस्य से हटाने के प्रावधान की मांग की। कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, 13 अप्रैल 1919 को हुए इस जघन्य हत्याकांड के बाद कांग्रेस की पहल पर ही ट्रस्ट का गठन किया गया। ट्रस्ट से किसी भी ट्रस्टी को हटाने का अधिकार सरकार को देने का प्रावधान भी उचित नहीं है। 

कांग्रेस को जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने प्रह्लाद पटेल ने कहा, कांग्रेस ने ट्रस्ट के कामकाज को कभी गंभीरता से नहीं लिया। 1951 में ट्रस्ट की स्थापना के समय जवाहर लाल नेहरू, सैफुद्दीन किचलू और मौलाना आजाद इसके स्थायी सदस्य थे, लेकिन उनके निधन के बाद कांग्रेस की तत्कालीन सरकारों ने स्थायी ट्रस्टी के पदों को भरने के लिए कोई पहल नहीं की।  

पटेल ने कहा कि सरकार द्वारा नामित सदस्यों में शहीदों के परिजनों को भी शामिल करने के उपाय किए जाएंगे। कांग्रेस की अनदेखी के आरोपों पर उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में पंजाब के मुख्यमंत्री, अमृतसर से सांसद, पंजाब के संस्कृति मंत्री और सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को सदस्य बनाने की बात कही गई है। ऐसे में यह आरोप उचित नहीं है। 

उन्होंने कहा कि पीएम रहते हुए 1970 में इंदिरा गांधी ने एक बार ट्रस्ट की बैठक की अध्यक्षता की थी। उसके बाद सात अगस्त 1998 को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस ट्रस्ट के बैठक की अध्यक्षता की। संस्था का कामकाज काफी लचर रहा है और उसमें सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अब संस्था को उसका हक मिल रहा है, उसे अपनी सुविधा के मुताबिक नहीं चलाया जा सकता।

विपक्ष की चिंता व्यर्थ

‘इतिहास बदलने की विपक्ष की चिंता व्यर्थ है। जलियांवाला बाग में 70 साल से व्याप्त बदहाली बताती है कि कांग्रेस ने सिर्फ अपने लोगों को ट्रस्ट में शामिल करने की चिंता की है।’
-श्वेत मलिक, भाजपा

भगत सिंह को मिले भारत रत्न

‘भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू व ऊधम सिंह जैसे शहीदों को याद कर उन्हें भारत रत्न दिया जाना चाहिए। उन शहीदों के परिवारों की मदद करते हुए सरकार को उन्हें सम्मानित करना चाहिए।’
-बलविंदर सिंह भुंडर, अकाली दल

नीतियां बनाने पर हो चर्चा

‘मेमोरियल को कौन चलाए यह बहस करने की बजाय शहीदों के परिवारों के कल्याण के लिए नीतियां बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।’
-संजय सिंह, आप

पार्टी अध्यक्ष होना न हो आधार

‘किसी पार्टी का अध्यक्ष होना ट्रस्ट का सदस्य होने का आधार नहीं होना चाहिए।’
-के विजय साई रेड्डी, वाईएसआर कांग्रेस
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें