भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर ईवीएम पर उनके द्वारा उठाए गए सवालों को लेकर निशाना साधा। भाजपा सांसद ने कहा कि वोटिंग मशीनें देश में उनके पिता स्वर्गीय राजीव गांधी ने 1987 में एक पायलट प्रोजेक्ट के दौरान पेश की थीं।
राहुल पर बरसे भाजपा सांसद
संसद के निचले सदन में चुनाव सुधारों पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि गांधी यह दावा कैसे कर सकते हैं कि चुनाव आयोग सत्ता में बैठे लोगों के साथ मिलकर चुनाव को प्रभावित कर रहा है, जबकि कांग्रेस ने ऐतिहासिक रूप से उन लोगों को पुरस्कृत किया है जो चुनाव निकाय में प्रमुख पदों पर थे।
निशिकांत दुबे ने आगे कहा कि, सभी विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम के बारे में बात की.... मैं सदन को बताना चाहता हूं कि ईवीएम सबसे पहले कांग्रेस ने पेश की थीं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1987 में एक पायलट प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में ईवीएम लाए थे और फिर 1991 में नरसिम्हा राव सरकार ने वोटिंग के लिए इलेक्ट्रॉनिक मशीनें पेश की थी।
दुबे ने बताया कि चयन समितियों ने 1961 और 1971 में अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि मतदाता सूची का एक विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) करने की आवश्यकता है। 1961 की समिति ने यह भी सिफारिश की थी कि धांधली से बचने के लिए ईवीएम का उपयोग करके चुनाव कराए जाने चाहिए।
राहुल के आरोपों पर निशिकांत के पलटवार
राहुल गांधी ने लोकसभा में बीजेपी पर हमला करते हुए आरोप लगाया था कि पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोट चोरी कर रही है, जिसे उन्होंने देश का सबसे बड़ा राष्ट्र-विरोधी कृत्य बताया। गांधी ने तीन सवाल उठाए, जिनके आधार पर उन्होंने दावा किया था कि भाजपा चुनाव आयोग का उपयोग कर भारतीय लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।
राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए दुबे ने कांग्रेस पर पारदर्शिता की बात करने में दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस काल में बतुक सिंह 10 साल तक यूपीएससी चेयरमैन रहे, देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन को सूडान का गवर्नर बनाया गया,वीएस रामादेवी हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल रहीं, टीएन शेषन को कांग्रेस ने अहमदाबाद से भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार बनाया और एमएस गिल सेवानिवृत्ति के बाद 10 वर्षों तक केंद्रीय मंत्री रहे।
आई4सी ने साइबर अपराध के आठ हजार करोड़ के संदिग्ध लेनदेन पर लगाई रोक
सरकार ने संसद को बताया 2024 में शुरू किए गए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने साइबर धोखाधड़ी रोकने में ना सिर्फ बैंकों और वित्तीय संस्थानों की मदद की, बल्कि आठ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा संदिग्ध लेनदेन पर भी रोक लगाई।
गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा को एक लिखित जवाब में बताया कि आई4सी ने पिछले साल सितंबर से अब तक 18.43 लाख संदिग्धों की पहचान की और 24.67 लाख म्यूल खातों का पता लगाया। इसके अलावा, 8031.56 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन को रद्द किया। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी के पैसों को ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।
कुमार ने कहा कि इसके अलावा, प्रतिबिंब पोर्टल के जरिये 16,840 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रतिबिंब पोर्टल, पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को साइबर अपराधियों को ट्रैक करने और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने में मदद करता है।
बिना दावे वाली दो हजार करोड़ की संपत्ति असली हकदारों को दी गई
केंद्र सरकार ने बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों के निपटान को आसान बनाने के लिए आपका पैसा-आपका अधिकार शुरू किया है। इसके तहत अक्तूबर और नवंबर में दो हजार करोड़ रुपये उनके असली हकदारों को दिए गए। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि बिना दावे वाले बैंक जमा, बीमा, लाभांश, शेयर, म्यूचुअल फंड और पेंशन आदि वित्तीय परिसंपत्तियों के निपटाने के लिए 4 अक्तूबर से 5 दिसंबर तक देश के 477 जिलों में जन प्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और फाइनेंशियल संस्थानों के अधिकारियों की भागीदारी के साथ कैंप लगाए गए थे।
विपक्ष चुनाव प्रक्रिया को लेकर कर रहा गलत प्रचार: रिजिजू
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने मंगलवार को विपक्षी दलों पर चुनाव प्रक्रिया को लेकर गलत प्रचार फैलाने का आरोप लगाया। चुनाव सुधारों पर लोकसभा में होने वाली बहस से पहले रिजिजू ने कहा कि सरकार को अब यह मौका मिलेगा कि वह विपक्ष के फैलाए जा रहे भ्रम को दूर कर सके।
रिजिजू ने कहा, लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा होगी। विपक्ष अपनी बात रखेगा और सरकार भी बताएगी कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर जो गलतफहमी और भ्रम पैदा किया गया है, उसे दूर किया जाएगा। सरकार लोगों के भरोसे और भागीदारी को लेकर फैले गलत प्रचार को साफ करेगी। इंडिगो की बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने और देरी के मामले पर रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि लोगों को सरकारी सिस्टम की वजह से परेशानी नहीं होनी चाहिए। नियम जरूरी हैं, लेकिन जनता को दिक्कत देना कोई सुधार नहीं।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
संजय सिंह ने भाजपा पर लगाया लोगों के मुद्दों से बचने का आरोप
राज्यसभा में चर्चा के दौरान आप सासंद संजय सिंह ने कहा, वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर यह चर्चा सरकार द्वारा विशेष रूप से क्यों प्रायोजित कराई जा रही है। निस्संदेह, देशभक्ति की भावना मजबूत होनी चाहिए और हर नागरिक-नौजवान, किसान, मजदूर, पढ़े-लिखे और अनपढ़-सभी को वंदे मातरम का महत्व समझना चाहिए। परंतु इस पहल के बीच कुछ घटनाएं चिंता उत्पन्न करती हैं। उदाहरणस्वरूप, उत्तर प्रदेश में जब व्यापारी बिजली संकट की शिकायत लेकर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के पास पहुंचे, तो उन्होंने समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल धार्मिक नारे लगाए और चले गए।
आप सांसद ने कहा कि आम आदमी पार्टी पर देशभक्ति के नारों की कमी का आरोप निराधार है। हमारे कार्यक्रमों में वंदे मातरम् और भारत माता की जय पूरे जोश से लगाए जाते हैं। लेकिन राष्ट्रभक्ति के ये नारे जनहित के मुद्दों से बचने का साधन नहीं बन सकते। मातृभूमि की वंदना तब नहीं होती जब देश की संपत्तियां-जमीन, बंदरगाह, खनिज, सार्वजनिक उपक्रम-निजी पूंजीपतियों को सौंप दी जाती हैं।
उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों से जुड़े मुद्दों पर भाजपा की असहजता चिंताजनक है। इतिहास भी गवाह है कि स्वतंत्रता आंदोलन में अनेक क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम का नारा लगाते हुए फांसी का वरण किया, जबकि आरएसएस का उस संघर्ष में योगदान खोज पाना कठिन है। तिरंगे और राष्ट्रगान के विरोध से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन के विरुद्ध लिखी गई चिट्ठियों तक कई ऐतिहासिक तथ्य सरकार के नैतिक दावों पर प्रश्न उठाते हैं।
संजय सिंह ने कहा, आज बेरोजगारी, महंगाई, प्रदूषण, सामाजिक न्याय और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर कटौती जैसे गंभीर मुद्दे देश के सामने हैं। परंतु सरकार इन पर चर्चा से बचती हुई प्रतीत होती है और राष्ट्रभक्ति के नारों को एक ढाल की तरह उपयोग कर रही है। उन्होंने कहा, सच्ची देशभक्ति उन करोड़ों श्रमिकों, किसानों और कमजोर तबकों में अधिक दिखाई देती है जो कठिन परिस्थितियों में भी देश और अपने परिवार का दायित्व निभाते हैं। इसलिए वंदे मातरम् का सम्मान जरूरी है, परंतु इसे जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के साधन के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
डीआरडीओ ने स्वदेशी अनुसंधान के कारण 5 वर्षों में की 2.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत: समिति
रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) पिछले पांच वर्षों में अपने स्वदेशी अनुसंधान के कारण 2,64,156 करोड़ रुपये की बचत करने में सक्षम रहा है। लोकसभा में मंगलवार को पेश रिपोर्ट में समिति ने यह भी कहा कि पिछले और वर्तमान वर्ष में, डीआरडीओ ने अगली पीढ़ी की हाइपरसोनिक तकनीकों और मिसाइलों के विकास में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने डीआरडीओ को उसकी विभिन्न उपलब्धियों के लिए बधाई दी। समिति ने कहा कि एजेंसी देश की स्वदेशी रक्षा अनुसंधान एवं विकास क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न जटिल और महत्वपूर्ण तकनीकों के क्षेत्र में अपनी सफलता की राह पर आगे बढ़ती रहेगी। सरकार ने अपने जवाब में समिति को हाल के दिनों में डीआरडीओ की कुछ उपलब्धियों के बारे में बताया है। नवंबर 2024 में पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया, जबकि मार्च 2024 में, डीआरडीओ ने अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग करके अपनी पहली मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (एमआईआरवी) तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह तकनीक एक ही मिसाइल को विभिन्न लक्ष्यों पर कई वारहेड ले जाने और तैनात करने में सक्षम बनाती है।
जनगणना में प्रवास के कारणों पर प्रश्न शामिल होंगे: केंद्र
सरकार ने लोकसभा को बताया कि जनगणना 2027 में वर्तमान निवास पर रहने की अवधि और प्रवास के कारण से संबंधित प्रश्न भी शामिल होंगे। मंगलवार को एक लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि जनगणना में प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी उस स्थान पर एकत्र की जाती है जहां वह गणना अवधि के दौरान पाया जाता है। वह एक सदस्य के इस प्रश्न का उत्तर दे रहे थे कि क्या जनगणना-2027 के दौरान प्रवासी श्रमिकों और अस्थायी निवासियों की गणना के लिए कोई विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं और क्या इसके लिए एक अलग डाटा संग्रह प्रक्रिया प्रस्तावित है।
मंत्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जन्म स्थान और अंतिम निवास स्थान के आधार पर प्रवासन डाटा एकत्र किया जाता है। उन्होंने कहा, जनगणना में वर्तमान निवास पर रहने की अवधि और प्रवास के कारण की जानकारी भी एकत्र की जाती है। जनगणना के लिए प्रश्नावली को केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक राजपत्र के माध्यम से क्षेत्रीय कार्य करने से पहले अधिसूचित किया जाता है। जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास जनगणना, अप्रैल और सितंबर 2026 के बीच होगी और दूसरे चरण में जनसंख्या गणना (पीई), फरवरी 2027 में होगी।
सही चुनाव तभी जब आयोग निष्पक्ष काम करे : अखिलेश
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग तटस्थ तरीके से काम नहीं कर रहा। वास्तविक चुनाव सुधार तभी हो सकते हैं, जब आयोग पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र होकर काम करे। अखिलेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त व अन्य चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए बनी समिति में और सदस्यों को शामिल करने का सुझाव दिया। अखिलेश ने यूपी के रामपुर व मिल्कीपुर उपचुनावों में भाजपा व पुलिस-प्रशासन पर वास्तविक वोटरों को मतदान से रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की वकालत की।
एसआईआर का मकसद सिर्फ नाम हटाना: बनर्जी
तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने एसआईआर को मनमाना करार देते हुए आरोप लगाया कि इसका मकसद मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि उनके नाम हटाना है। बनर्जी ने सवाल उठाया कि 2024 की सूची में मौजूद किसी मतदाता से कैसे कहा जा सकता है कि वह अब मतदाता नहीं है, क्योंकि उसका नाम 2002 की सूची में नहीं था। मतदाताओं को हटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि प. बंगाल में अत्यधिक कार्यभार के कारण कई बूथ लेवल अधिकारियों ने आत्महत्या की या बीमार हो गए।
राष्ट्रीय गीत ने एकजुट करने में निभाई अहम भूमिका: देवगौड़ा
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने राज्यसभा में कहा कि वंदे मातरम ने पूरे देश को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई है। वंदे मातरम इतने दशकों के बाद भी प्रासंगिक है। सभी को एक सूत्र में पिरोने का काम करता है। उन्होंने कहा कि हर राज्य का एक गीत है, जो वंदे मातरम से ही प्रेरित है। उन्होंने सदन से अनुरोध किया कि इस गीत को 150 तरीके से रिकॉर्ड कर इसके इतिहास को संजोया जा सकता है।
'कांग्रेस हिंदुओं को अपमानित करने की राजनीति करती है'
भाजपा के सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था। कांग्रेस आज भी हिंदुओं को अपमानित करने की राजनीति करती है। उन्होंने विपक्ष पर टुकड़े- टुकड़े गैंग का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी नेता भारत को देश नहीं बल्कि यूनियन ऑफ स्टेट्स बताते हैं।
'बाहरियों के सामने घुटने टेकने वाले इसकी बात कर रहे'
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा कि वंदे मातरम का जिक्र वह लोग कर रहे हैं, जिन्होंने बाहरियों के सामने घुटने टेक दिए। देश की आजादी के समय यह लोग कहा थे। उन्होंने ट्रेजरी बेंच पर जमकर निशाना साधा और कहा कि केवल कह देने से वंदे मातरम का श्रेय नहीं मिलता।
चुनाव जीत जाएं, देश हार जाए यह कौन-सा वंदे मातरम: मनोज
राजद सांसद मनोज झा ने कहा, यह केवल गीत का उत्सव नहीं है, बल्कि वर्तमान सामाजिक स्थिति का मूल्यांकन करने का भी मौका है। देश में ध्रुवीकरण लगातार बढ़ रहा है। क्या बंकिम बाबू ने सोचा था कि देश ऐसे बंटेगा। कुछ महीने पहले आई लव महाकाल बनाम आई लव मोहम्मद को लेकर झगड़ा करा दिया गया। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना कला हो सकती है, लेकिन जीत जाए और देश हार जाए, यह कौन-सा वंदे मातरम है।
गीत नहीं, देश की धड़कन: सभापति
राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने वंदे मातरम को अमर भजन बताते हुए कहा कि यह देश को मातृभूमि के प्रति प्रेम की भावना से बांधता है। यह एक गीत से कहीं अधिक, हमारे राष्ट्र की धड़कन है। असंख्य माताओं की अनकही प्रार्थना और स्वतंत्रता का सपना देखने वालों का अटूट साहस है। उन्होंने सदस्यों से एक राष्ट्र के रूप में एकजुट होने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
वायु प्रदूषण से सीधे मौत का निर्णायक डाटा नहीं: मंत्री
स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में कहा कि ऐसा कोई निर्णायक डाटा उपलब्ध नहीं है, जो सीधे तौर पर बताए कि मौत या बीमारी केवल वायु प्रदूषण के कारण हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण श्वसन संबंधी बीमारियों और संबंधित रोगों के लिए ट्रिगर करने वाले कारकों में से एक है, लेकिन स्वास्थ्य पर इसका असर खान-पान, आजीविका, आनुवंशिकता जैसे कई कारकों का मिश्रण होता है।
जनगणना : प्रवास के कारणों पर रहेंगे सवाल
सरकार ने लोकसभा को बताया कि जनगणना 2027 में वर्तमान निवास पर रहने की अवधि और प्रवास के कारण से संबंधित प्रश्न भी शामिल होंगे। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि जनगणना में प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी उस स्थान पर एकत्र की जाती है, जहां वह गणना अवधि के दौरान पाया जाता है। उनसे पूछा गया था कि क्या जनगणना-2027 के दौरान प्रवासी श्रमिकों और अस्थायी निवासियों की गणना के लिए कोई विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं।
असली हकदारों को दी बिना दावे वाली दो हजार करोड़ की संपत्ति
केंद्र सरकार ने बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों के निपटान को आसान बनाने के लिए आपका पैसा-आपका अधिकार शुरू किया है। इसके तहत अक्तूबर और नवंबर में दो हजार करोड़ रुपये उनके असली हकदारों को दिए गए। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि बिना दावे वाले बैंक जमा, बीमा, लाभांश, शेयर, म्यूचुअल फंड और पेंशन जैसी वित्तीय परिसंपत्तियों के निपटाने के लिए 4 अक्तूबर से 5 दिसंबर तक देश के 477 जिलों में जन प्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और फाइनेंशियल संस्थानों के अधिकारियों की भागीदारी के साथ कैंप लगाए गए थे।
आई4सी ने साइबर अपराध के 8 हजार करोड़ के संदिग्ध लेनदेन पर लगाई रोक
सरकार ने संसद को बताया 2024 में शुरू किए गए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने साइबर धोखाधड़ी रोकने में न सिर्फ बैंकों और वित्तीय संस्थानों की मदद की, बल्कि आठ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा संदिग्ध लेनदेन पर भी रोक लगाई। गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने लोकसभा को एक लिखित जवाब में बताया कि आई4सी ने पिछले साल सितंबर से अब तक 18.43 लाख संदिग्धों की पहचान की और 24.67 लाख म्यूल खातों का पता लगाया। इसके अलावा, 8031.56 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन को रद्द किया। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी के पैसों को ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।
कुमार ने कहा कि इसके अलावा, प्रतिबिंब पोर्टल के जरिये 16,840 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रतिबिंब पोर्टल, पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को साइबर अपराधियों को ट्रैक करने और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने में मदद करता है। ब्यूरो