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Parliament: केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नहीं बनेगा अलग मंत्रालय, सरकार ने बताया- पुराने तरीके से होगा विकास

Tue, 24 Mar 2026 05:14 PM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन पर सरकार ने साफ किया है कि अलग मंत्रालय या नई नीति बनाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि संविधान के तहत मौजूदा व्यवस्था में ही सभी योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मंत्रालयों के बीच समन्वय और संसदीय समिति की निगरानी से विकास कार्य प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहे हैं।

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नित्यानंद राय, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन और सीमावर्ती इलाकों के विकास को लेकर सरकार ने लोकसभा में अपनी स्थिति साफ कर दी है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि फिलहाल केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग मंत्रालय या नई नीति बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। वहीं, सीमा से सटे क्षेत्रों में विकास के लिए चल रही योजनाओं के जरिए बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। सरकार का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के तहत ही योजनाओं का प्रभावी संचालन और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का काम जारी है।

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नित्यानंद राय ने आगे बताया कि देश के केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) का प्रशासन संविधान के अनुच्छेद 239 से 241 के तहत किया जाता है। उन्होंने कहा कि अभी सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग मंत्रालय, विशेष समिति या नई नीति बनाई जाए। उन्होंने बताया कि फिलहाल विभिन्न मंत्रालयों के बीच नियमित बातचीत और समन्वय से ही योजनाएं बनाई और लागू की जाती हैं। साथ ही, संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति केंद्र शासित प्रदेशों के कामकाज की निगरानी और समीक्षा करती है।

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सीमावर्ती इलाकों के विकास पर क्या कहा?
सरकार ने बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (बीएडीपी) के बारे में भी जानकारी दी। इस योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा से 0 से 10 किलोमीटर के भीतर आने वाले गांवों और कस्बों में विकास कार्य किए जाते हैं। यह योजना 16 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सीमा पर रहने वाले लोगों की जिंदगी बेहतर बनाना और उन्हें जरूरी सुविधाएं देना है। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, खेती, खेल, पीने का पानी, स्वच्छता और छोटे उद्योगों से जुड़े काम किए गए।

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इस योजना के तहत करीब 39,248 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई
सरकार के अनुसार, साल 2004-05 से अब तक इस योजना के तहत करीब 39,248 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें सड़क, पुल, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूलों में अतिरिक्त कमरे, आंगनवाड़ी, हॉस्टल और रोजगार से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। हालांकि, सरकार ने बताया कि यह योजना अब अपने अंतिम चरण (सनसेट फेज) में है। पिछले तीन वर्षों में इस योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को करीब 168.90 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, ताकि पहले से चल रही परियोजनाओं को पूरा किया जा सके।

बैंकों में जमा 60,518 करोड़ रुपये का कोई दावेदार नहीं
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता कोष में हस्तांतरित की गई दावारहित राशि जनवरी 2026 के अंत तक 60,518 करोड़ रुपये हो गई है। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में यह जानकारी दी। इसके अलावा, बीमा कंपनियों के पास 8,973.89 करोड़ और म्यूचुअल फंड में 3,749.34 करोड़ की दावारहित राशि बकाया है। सरकार ने बताया, इन संपत्तियों के वास्तविक हकदारों की पहचान करने और दावा प्रक्रिया सरल बनाने के लिए कई नियामक कदम उठाए गए हैं। 

चाबहार : निवेश का लक्ष्य पूरा भारत पर अब कोई देनदारी नहीं
भारत ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह परियोजना में अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा कर लिया है। बंदरगाह उपकरणों की खरीद के लिए तय 1,129.46 करोड़ रुपये का योगदान दिया जा चुका है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि अब नई दिल्ली की ओर से कोई अतिरिक्त वित्तीय देनदारी शेष नहीं है। राज्यसभा में सांसद जॉन ब्रिटास के सवाल का लिखित जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि 13 मई 2024 को इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लि.(आईपीजीएल) और ईरान के बीच शहीद बेहिश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए 10 साल का अनुबंध हुआ था। भारत ने अनुबंध के तहत उपकरणों के लिए तय रकम की प्रतिबद्धता पूरी कर दी है। मंत्री ने अमेरिकी प्रतिबंधों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अमेरिका ने 26 अप्रैल तक की सशर्त छूट दी है। सरकार इन घटनाक्रमों के निहितार्थों को सुलझाने के लिए सभी संबंधित और अमेरिकी पक्ष के साथ संपर्क में है। बता दें, चाबहार बंदरगाह को अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और मध्य एशिया के साथ व्यापारिक संबंधों के लिए कायापलट करने वाला प्रोजेक्ट माना जाता है। 
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पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ भेदभाव पर कोई केंद्रीय डाटा नहीं
सरकार ने लोकसभा में बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के खिलाफ भड़काऊ भाषण, नस्ली टिप्पणी, उत्पीड़न और भेदभाव से जुड़े मामलों का कोई केंद्रीकृत डाटा नहीं रखा जाता। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि पुलिस व कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, इसलिए अपराध रोकना, जांच करना और दोषियों पर कार्रवाई करना राज्यों की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो राज्यों से मिले आंकड़ों के आधार पर क्राइम इन इंडिया रिपोर्ट जारी करता है, पर पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ भेदभाव से जुड़े अलग डाटा का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।
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