संसद का बजट सत्र अपने निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की जा सकती है। सूत्रों ने बताया कि लोकसभा और राज्यसभा कल अनिश्चितकाल के लिये स्थगित हो सकती है। संसद का बजट सत्र 31 जनवरी को शुरू हुआ था और इसका पहला चरण 11 फरवरी को पूरा हुआ। प्रथम चरण में आम बजट पेश किया गया था। बजट सत्र का दूसरा चरण 14 मार्च से शरू हुआ था। बजट सत्र के मूल कार्यक्रम के अनुसार, सत्र आठ अप्रैल तक चलना है। इससे पहले लोकसभा ने बुधवार को सामूहिक संहार के हथियार और उनकी वितरण प्रणाली (गैरकानूनी गतिविधियों का निषेध) संशोधन विधेयक, 2022 को पारित किया। इसके बाद सदन को गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
पीएम मोदी ने सदन में हुई चर्चा पर जाहिर की खुशी
इस बीच यूक्रेन संकट और वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी को लेकर संसद में हुई चर्चा पर पीएम मोदी ने कहा कि अपने साथी नागरिकों की सुरक्षा और भलाई की देखभाल करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है और भारत सरकार यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी कि हमारे लोगों को प्रतिकूल परिस्थितियों में किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि बहस का समृद्ध स्तर और रचनात्मक बिंदु बताते हैं कि जब विदेश नीति के मामलों की बात आती है तो द्विदलीयता कैसे होती है। इस तरह की द्विदलीयता विश्व स्तर पर भारत के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में संसद ने यूक्रेन की स्थिति और ऑपरेशन गंगा के माध्यम से हमारे नागरिकों को वापस लाने के भारत के प्रयासों पर एक स्वस्थ चर्चा देखी है। मैं उन सभी सांसद साथियों का आभारी हूं जिन्होंने इस चर्चा को अपने विचारों से समृद्ध किया।
जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से घुसपैठ पर दी जानकारी
केंद्र ने बुधवार को राज्यसभा को सूचित किया कि पिछले पांच वर्षों में जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से घुसपैठ के प्रयासों में चार गुना गिरावट आई है। गृह मंत्रालय द्वारा एकत्रित आंकड़ों के अनुसार, 2017 में घुसपैठ के 136 प्रयास किए गए, जबकि 2021 में केवल 34 प्रयास किए गए। 2018 में 143, 2019 में 138 और 2020 में 51 प्रयासों के साथ जम्मू और कश्मीर में सीमा पार से घुसपैठ में काफी कमी आई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक लिखित जवाब के जवाब में उच्च सदन में यह जानकारी साझा की।
सीमा पार से घुसपैठ में कमी का कारण बताते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने सीमा पार से घुसपैठ को रोकने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया है। मंत्री ने कहा कि इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमा/नियंत्रण रेखा पर बहु-स्तरीय तैनाती, सीमा पर बाड़ लगाना, बेहतर खुफिया और परिचालन समन्वय, सुरक्षा बलों को उन्नत हथियारों से लैस करना और घुसपैठियों के खिलाफ सक्रिय कार्रवाई करना शामिल है।
गृह राज्य मंत्री की प्रतिक्रिया तब आई जब उनसे पूछा गया था कि क्या पिछले पांच वर्षों के दौरान जम्मू और कश्मीर में सीमा पार से घुसपैठ बढ़ी है और सरकार द्वारा खतरे की जांच के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
2021 में सबसे अधिक अल्पसंख्यकों की मौत
गृह मंत्रालय ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि विभिन्न आतंकवादी हमलों में 11 मौतों के साथ जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों की हत्या 2021 में अपने चरम पर रही। आंकड़ों के अनुसार, 2017 में जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक समुदायों के कुल 11 लोग मारे गए, 2018 में तीन, 2019 में छह, 2020 में तीन और 2021 में 11 लोग मारे गए।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उच्च सदन में आंकड़े साझा किए जिसमें 2017 और 2021 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संबंधी घटनाओं में अपनी जान गंवाने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के 34 लोगों की हत्या का उल्लेख किया गया था।
घाटी में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा क्या उपाय किए गए हैं, इस सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि सरकार ने घाटी में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए हैं। इनमें मजबूत सुरक्षा और खुफिया ग्रिड, समूह सुरक्षा, नाकों पर चौबीसों घंटे की चेकिंग शामिल है। साथ ही उन क्षेत्रों में गश्त की जा रही है जहां अल्पसंख्यक रहते हैं। इसके अलावा आतंकवादियों के खिलाफ सक्रिय अभियान भी शामिल है।
विधेयक राज्यसभा में पेश
‘दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक, 2022’ को बुधवार को राज्यसभा में पेश किया गया। शाह ने उच्च सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक है जिसका उद्देश्य 100 साल पुराने विधेयक में आज की परिस्थिति के अनुरूप परिवर्तित प्रौद्योगिकी का समावेश करना तथा दोषसिद्धि के प्रमाण को पुख्ता करना है। यह विधेयक लोकसभा में चार अप्रैल को पारित हो चुका है। शाह ने कहा कि कितने भी अपराधियों को पकड़ लिया जाए, उनकी दोषसिद्धि जरूरी है। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार जीने वाले, समाज के बहुत बड़े वर्ग में, अपराधियों की दोषसिद्धि के बिना, कानून के प्रति विश्वास को मजबूत नहीं किया जा सकता।
विपक्ष ने साधा निशाना
राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने ब्रिटिशकालीन बंदी शिनाख्त अधिनियम की जगह केंद्र सरकार की ओर से लाए गए विधेयक को अस्पष्ट तथा मौलिक अधिकारों एव मानवाधिकारों का उल्लंघन करार देते हुए इसे प्रवर समिति अथवा स्थायी समिति में भेजने की मांग की। उच्च सदन में ‘दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक, 2022’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि यह विधेयक हाल में लोकसभा में पारित हुआ है। वहां लगभग सभी विपक्षी दलों ने इसे प्रवर समिति या स्थाई समिति में भेजे जाने की मांग की थी। लेकिन फिर भी इस विधेयक को वहां पारित कर दिया गया। चिदंबरम ने कहा कि डीएनए प्रौद्योगिकी विधेयक 2019 से लंबित है, अगर इस विधेयक को लाया जा सकता है तो उस विधेयक को भी लाया जा सकता है। उन्होंने प्रश्न किया वह क्यों लंबित है ?
दंड प्रक्रिया शिनाख्त विधेयक को संसद से मिली मंजूरी
दंड प्रक्रिया शिनाख्त विधेयक 2022 को राज्यसभा ने भी बुधवार को अपनी मंजूरी दे दी। इसके साथ ही विधेयक को संसद की हरी झंडी मिल गई। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। इससे पहले दिन में बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इससे किसी की भी निजता का हनन नहीं होगा। बल्कि इस बिल से दोष सिद्धि की दर में बढ़ोतरी होगी। शाह ने कहा कि इस बिल का उद्देश्य 100 साल पुराने कानून को बदलकर आधुनिक तकनीकी के जरिये जांच प्रक्रिया को मजबूती देना है।
उल्लेखनीय है कि इस बिल को लोकसभा ने सोमवार को ही पारित कर दिया था। गृहमंत्री ने विपक्ष की चिंता का निराकरण करते हुए कहा, मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी की भी निजता भंग नहीं होगी न ही कोई डाटा लीक होने का प्रश्न है। शाह ने कहा कि इस बिल का मकसद पुलिस और फोरेंसिक टीम की क्षमता को बढ़ाना है। इसके अलावा प्रस्तावित कानून से अपराधियों की जांच में वैज्ञानिक तरीकों को स्थान मिलेगा और थर्ड डिग्री से छुटकारा मिलेगा।
पुलिस को अपराधियों के भौतिक जैविक नमूने लेने का अधिकार मिला
इस बिल में पुलिस को गिरफ्तार आरोपियों और दोषियों की भौतिक और जैविक नमूने लेने का अधिकार दिया गया है। प्रस्तावित कानून अंग्रेजों के जमाने 1920 के कैदी शिनाख्त कानून का स्थान लेगा। बिल के मुताबिक इसमें पुलिस के लिए अपराधियों के शारीरिक मापदंड का ब्योरा लेने का दायरा बढ़ाया गया है।
माप से मना करने पर भी जेल
शारीरिक माप लेने से रोकने को भारतीय दंड संहिता की धारा 186 के तहत अपराध माना जाएगा, जिसके लिए तीन माह की कैद या पांच सौ रुपये जुर्माना देना होगा।
- ऐसे लोग कर सकेंगे इनकार : जो महिला-बच्चों के खिलाफ अपराध में दोषी साबित या गिरफ्तार नहीं हुए हैं या फिर सात साल से कम कैद वाले अपराध के चलते हिरासत में हैं, वे जैविक नमूने देने से इनकार कर सकते हैं।
- 75 साल तक संग्रहीत रहेगा डाटा : पुलिस को कैदियों के अंगुलियों के निशान, हथेली के छापों और पदचिन्हों के निशान, तस्वीरें, पुतलियों और रेटिना स्कैन, शारीरिक व जैविक नमूने इकट्ठे करने का अधिकार होगा। धारा 53 और 53 ए के तहत हस्ताक्षर, लेखनी या व्यवहार से जुड़े अन्य नमूने भी जुटा सकेंगे। कैदियों की शारीरिक माप का रिकॉर्ड 75 साल तक संग्रहीत रखा जा सकेगा।
सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें भारत में
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को सड़क हादसों पर चिंता जताई और कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या के मामले में भारत दुनिया में सबसे ऊपर है। गडकरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि जिनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय सड़क महासंघ द्वारा प्रकाशित विश्व सड़क सांख्यिकी (डब्ल्यूआरएस) 2018 के नवीनतम अंक के आधार पर दुर्घटनाओं की संख्या के अनुसार भारत तीसरे स्थान पर है। गडकरी ने कहा कि सड़क हादसों में मरने वाले लोगों की संख्या में भारत पहले नंबर पर है और घायलों की संख्या के मामले में तीसरे नंबर पर है।
देश में साल 2020 में सड़क हादसों में सबसे अधिक करीब 69.80% 18-45 वर्ष के लोगों की मौत हुई। राजमार्ग के निर्माण से जुड़े सवाल के जवाब में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री ने बताया, कुल 22 ग्रीन फील्ड हाईवे (1,63,350 करोड़ की लागत से 2485 किमी के पांच एक्सप्रेस-वे और 1,92,876 करोड़ रुपये से 5816 किमी दूरी के 17 एक्सेस कंट्रोल्ड हाइवे) का निर्माण किया गया है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस के तीन भागों- दिल्ली दौसा-लालसोट-जयपुर (214 किमी), वडोदरा अंकलेश्वर(100) और कोटा- रतलाम-झाबुआ (245) को मार्च 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।
जम्मू कश्मीर: धारा 370 हटाए जाने के बाद 87 नागरिक और 99 सुरक्षाकर्मी मारे गए
सरकार ने बुधवार को बताया कि जम्मू कश्मीर में पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कम से कम 370 नागरिक और 99 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की नीति आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की है। उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में आतंकवादी हमले कम हुए हैं। उन्होंने बताया कि 2018 में 417 आतंकवादी हमले हुए जबकि 2019 में 255 आतंकी हमले, 2020 में 244 आतंकी हमले और 2021 में 229 आतंकी हमले हुए। उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में 2014 से 2019 तक, पांच साल में कम से कम 177 नागरिक और 406 सुरक्षा कर्मी मारे गए थे। उन्होंने बताया कि पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कम से कम 370 नागरिक और 99 सुरक्षा कर्मी मारे गए हैं।
घाटी छोड़ने वाले 610 कश्मीरी पंडितों की संपत्ति वापस की गई
सरकार ने बुधवार को संसद में बताया कि अत्याचार के कारण घाटी छोड़ने वाले कश्मीरी पंडितों में से 610 लोगों की संपत्ति उन्हें वापस की गई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। राय ने कहा कि जम्मू कश्मीर के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी प्रवासी लोगों की अचल संपत्ति के कानूनी अभिरक्षक होते हैं और जम्मू कश्मीर सरकार ने ऐसे लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए पिछले साल एक पोर्टल की शुरूआत की है जो अत्याचार के कारण घाटी छोड़ने के लिए विवश हुए और जिनकी संपत्ति जबरन ले ली गई।
अब तक 14 हिंदुओं में से चार कश्मीरी पंडितों की हत्या
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि जम्मू-कश्मीर में 2019 से अब तक 14 हिंदुओं में से चार कश्मीरी पंडितों की आतंकवादियों ने हत्या कर दी है। राय ने यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों के 34 लोग मारे गए, जिनमें 2021 में 11 लोग शामिल थे। मंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद 2105 प्रवासी प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत प्रदान की गई नौकरियों को लेने के लिए कश्मीर घाटी लौट आए हैं।
सामूहिक संहार के हथियारों के प्रसार, वित्त पोषण को रोकने वाले विधेयक को मंजूरी
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिये बिना बुधवार को कहा कि कुछ ऐसे देश हैं जो वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के दायित्वों के अनुरूप कार्य एवं नीतियां नहीं अपनाते हैं और इनमें से कुछ देश हमारे काफी पास हैं। जयशंकर ने कहा कि सरकार अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1540, सामूहिक संहार के हथियारों संबंधी 2005 के कानून, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की विवेचना एवं अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सामूहिक संहार के हथियारों एवं उनसे जुड़ी प्रणालियों के प्रसार के वित्त पोषण पर रोक लगाने के प्रावधान वाला विधेयक लाई। मंत्री के जवाब के बाद निचले सदन में ‘सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधि विरूद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) संशोधन विधेयक, 2022’ को मंजूरी दे दी गई।
संसद ने संविधान अनुसूचित जनजातियां आदेश संशोधन विधेयक को दी मंजूरी
संसद ने बुधवार को त्रिपुरा राज्य से संबंधित ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2022’ को मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने इस विधेयक को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। इस विधेयक में त्रिपुरा राज्य के संबंध में ‘डार्लोंग’ समुदाय को अनुसूचित जनजातियों की सूची की प्रविष्टि 9 में ‘कुकी’ की उपजाति के रूप में सम्मिलित करने का प्रावधान है।
पांच वर्षों में 22 आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज
सरकार ने कहा है कि पिछले पांच सालों में 22 आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में आपराधिक मामले दर्ज किए गए। राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि ये मामले 2017 से 30 मार्च 2022 के दौरान दर्ज किए गए। उत्तर प्रदेश में फरार घोषित किए गए आईपीएस अधिकारियों के बारे में पूछे जाने पर राय ने कहा कि प्रदेश में एक आईपीएस अधिकारी को फरार घोषित किया गया है। मंत्री पूछा गया था कि क्या यह सही है कि देश में पुलिस बल में अपराधों में संलिप्तता बढ़ रही है और क्या इस पर कोई अध्ययन किया गया है कि यह प्रवृत्ति क्यों बढ़ रही है? इस पर मंत्री ने कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची के मुताबिक पुलिस राज्य का विषय है। यह मुख्य रूप से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे मामलों में केस दर्ज करे।
सरकार को तीन माह में 13 लाख से ज्यादा जन शिकायतें मिलीं
सरकार ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि केंद्रीकृत जन शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली के तहत केंद्र को जनवरी से मार्च के दौरान 13 लाख से ज्यादा शिकायतें मिलीं। कार्मिक, जन शिकायतें एवं पेंशन मामलों के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि इस साल 31 मार्च तक केंद्र सरकार को 13,32,567 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 4,18,451 का निपटारा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि 2021 में सरकार को 30.23 लाख से ज्यादा शिकायतें मिली थीं, जिनमें से 31.35 लाख शिकायतों का निपटारा कर दिया गया।
सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई में 161 लोगों की मौत
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री विरेंद्र कुमार ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि सिर पर मैला ढोने से मौत का कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं है, लेकिन सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई में पिछले तीन सालों में 161 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि 2019 में ऐसी सबसे ज्यादा 118 मौत हुई, जबकि 2020 में 19 और 2021 में 24 मौतें हुईं। एक अन्य सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने कहा है कि सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई में 1993 से अब तक 971 लोगों की मौत हुई है। मंत्री ने कहा कि देश में सिर पर मैला ढोना प्रतिबंधित है।