तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने सरकार पर संसद का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया है। ओ ब्रायन ने कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण बिलों का मसौदा (ड्राफ्ट) अभी तक सांसदों को नहीं मिला है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया। उन्होंने लिखा कि वे लगातार संसद का मज़ाक उड़ा रहे हैं। ओ ब्रायन ने कहा कि संसद की बैठक अगले 48 घंटों में शुरू होने वाली है, लेकिन किसी ने भी प्रस्तावित संविधान संशोधन की कॉपी तक नहीं देखी है। ओ ब्रायन ने सरकार के इस रवैये को तानाशाही बताया है।
कांग्रेस महासचिव ने भी सरकार पर साधा निशाना
वही, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को संसद के आगामी विशेष सत्र को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया और इसे लोकतंत्र का मजाक बताया। उन्होंने सत्र के समय पर भी सवाल उठाया और दावा किया कि सांसदों को चर्चा से पहले संवैधानिक संशोधन विधेयक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 से संबंधित प्रमुख संवैधानिक संशोधनों पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
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एक्स पर एक पोस्ट में रमेश ने लिखा, 'संसद का विशेष सत्र परसों यानी 16 अप्रैल को शुरू होगा जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा। मोदी सरकार ने विपक्ष के उन बिल्कुल उचित और वैध अनुरोधों को खारिज कर दिया है जिनमें चुनाव समाप्त होने के बाद (आज से पंद्रह दिन बाद) सर्वदलीय बैठक बुलाने की बात कही गई थी।' उन्होंने पोस्ट में लिखा 'आज सुबह तक, मोदी सरकार ने सांसदों के साथ संविधान संशोधन विधेयक साझा नहीं किए हैं, जिन पर उन्हें बहस और मतदान करना है। यह लोकतंत्र का घोर मजाक है।
बता दें कि विपक्षी दल सरकार के इस कदम की लगातार आलोचना कर रहे हैं। दरअसल, केंद्रीय कैबिनेट ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करने के लिए बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इन प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना है। इसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी जाएंगी।
इस विधायी पैकेज में संविधान संशोधन बिल के साथ-साथ परिसीमन अधिनियम में भी बदलाव शामिल होने की उम्मीद है। इससे सीटों की संख्या बढ़ने के बाद निर्वाचन क्षेत्रों का दोबारा निर्धारण किया जा सकेगा। इसके अलावा, एक और बिल के जरिए दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिला आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव है।
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