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Pollution: संसद में गूंजा प्रदूषण का मुद्दा, घुट रही दिल्ली... क्या कर रही सरकार? आरोपों पर केंद्र का जवाब

Fri, 12 Dec 2025 04:33 AM IST
पवन पांडेय अमर उजाला ब्यूरो

सार

संसद में प्रदूषण के मुद्दे पर विपक्ष और सरकार आमने-सामने दिखे। इस दौरान विपक्ष ने कहा कि वायु प्रदूषण मानव निर्मित आपदा जिंदगी खतरे में, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। वहीं सरकार ने जवाब में कहा- प्रदूषण की आधिकारिक रैंकिंग नहीं डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस बाध्यकारी नहीं है। पढ़ें आरोप-प्रत्यारोप...
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संसद की फाइल तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का मुद्दा गुरुवार को संसद में उठा। वायु प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताते हुए विपक्षी सांसदों ने सरकार को घेरा। बीजद सांसद मानस रंजन मंगराज ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए दिल्ली में हर साल होने वाले प्रदूषण को मानव निर्मित आपदा करार दिया। वहीं, लोकसभा में कांग्रेस सदस्य मणिकम टैगोर ने कहा कि दिल्ली का दम घुट रहा है। हवा की खराब गुणवत्ता के कारण राजधानी में लाखों लोग खतरे में हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सरकार क्या कर रही है? जवाब में सरकार ने कहा कि दुनिया में प्रदूषण की कोई आधिकारिक रैंकिंग नहीं है।
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पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि कई संगठनों की ओर से जारी की जाने वाली रैंकिंग, जैसे आईक्यूएयर वर्ल्ड एयर क्वालिटी रैंकिंग, डब्ल्यूएचओ एयर क्वालिटी डाटाबेस, एनवायरनमेंटल परफॉर्मेंस इंडेक्स और ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज किसी भी अधिकृत अंतरराष्ट्रीय तंत्र का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वायु गुणवत्ता गाइडलाइंस बाध्यकारी नहीं हैं, बल्कि सलाह के तौर पर जारी की जाती है। देशों को अपने भूगोल, पर्यावरणीय हालात और राष्ट्रीय जरूरतों के हिसाब से मानक तय करने होते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, भारत 12 प्रमुख प्रदूषकों के लिए राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (एनएएक्यूएस) पहले ही अधिसूचित कर चुका है। इसके अलावा, सरकार हर साल स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के जरिये 130 शहरों का मूल्यांकन और रैंकिंग करती है।
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दिल्ली में हवा बेहतर रहने वाले दिनों की संख्या बढ़ी- यादव
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यसभा में बताया कि दिल्ली में वायु प्रदूषण घटाने की सरकार की कोशिशों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। पराली प्रबंधन से लेकर अन्य कदमों की वजह से दिल्ली में हवा बेहतर रहने वाले दिनों की संख्या बढ़ी है। साल 2016 में ऐसे 110 दिन थे, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 से कम रहा था, जबकि 2025 में यह बढ़कर 200 दिन हो गया है। यादव ने बताया कि इस वर्ष जनवरी-फरवरी में हवा की औसत गुणवत्ता 2018 की तुलना में बेहतर रही। 2018 में जहां एक्यूआई 213 था, वहीं इस वर्ष यह 187 दर्ज किया गया। दिल्ली में पहले ऐसे 71 दिन होते थे, जब एक्यूआई 301 से 400 के बीच या उससे ऊपर पहुंच जाता था, पर 2025 में यह संख्या सिर्फ 50 दिन रह गई है। वायु गुणवत्ता आयोग के गठन व सरकार के लगातार प्रयासों से यह सुधार संभव हुआ है।

भारत ने वैश्विक जलवायु जोखिम सूचकांक को नकारा
पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन ने कहा, भले ही वैश्विक जलवायु जोखिम सूचकांक में भारत 9वें स्थान पर है, लेकिन देश किसी भी बाहरी रैंकिंग को अपनी नीतियां बनाने का आधार नहीं मानता।

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बीजिंग योजना अपनाएं- कांग्रेस
मणिकम टैगोर ने चेताया, वायु प्रदूषण से लाखों लोगों का जीवन खतरे में है। उन्होंने बीजिंग योजना अपनाने की मांग की, जिसमें सभी थर्मल पावर प्लांट में एफडीजी सिस्टम लगाना, दिल्ली-एनसीआर में दो वर्ष में 50 फीसदी सार्वजनिक बसों को इलेक्ट्रिक करने जैसे उपाय शामिल हैं।

यूपी-हरियाणा में स्वच्छ हवा के लिए 539 करोड़
विश्व बैंक ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ हवा को बढ़ावा देने के लिए 60 करोड़ डॉलर यानी 539 करोड़ रुपये के दो कार्यक्रमों को मंजूरी दी है।

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