फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Parliament: संसद भवन पर मची रार में भाजपा का दांव चल गया विपक्ष, क्या दलित-आदिवासी का सवाल लगाएगा नैया पार?

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 26 May 2023 03:08 PM IST

सार

Parliament: 2017 में रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति बने, तो भाजपा ने उसे खूब भुनाया था। जब राष्ट्रपति पद के चुनाव में उनकी उम्मीदवारी का एलान हुआ तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कई बार 'दलित' शब्द का इस्तेमाल किया था...
विज्ञापन
विज्ञापन
New Parliament building - फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt


अब विपक्ष ने भाजपा का दांव भाजपा पर ही चला ...

संसद के नए भवन के उद्घाटन पर अब विपक्ष ने भाजपा का वही 'दांव' भाजपा पर ही चल दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, संसद संवैधानिक मूल्यों से बनती है, न कि अहंकार की ईंटों से। संसद के नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों नहीं कराया जाना और समारोह में भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाना, यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है। इसके बाद कांग्रेस नेता एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति के हाथों न कराना, देश के सभी आदिवासियों का अपमान है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी कह दिया कि संसद भवन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति को न बुलाकर भाजपा ने आदिवासियों और दलित समुदायों का अपमान किया है। राम मंदिर के शिलान्यास पर मोदी सरकार ने तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को नहीं बुलाया। संसद भवन के शिलान्यास पर भी रामनाथ कोविंद को नहीं बुलाया गया। अब नए संसद भवन के उद्घाटन पर मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नहीं बुला रहे। देशभर की अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां पूछ रही हैं कि क्या हमें अशुभ माना जाता है, इसलिए उद्घाटन समारोह में नहीं बुलाया जा रहा।

यह वीडियो देखें: नए संसद भवन पर शिवसेना ने आडवाणी का जिक्र कर बीजेपी पर साधा निशाना

क्या '2024' को देख रहे हैं राहुल और केजरीवाल?

कांग्रेस पार्टी ने कह दिया है कि नए संसद भवन के उद्घाटन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को न बुलाना, मोदी सरकार के इस कदम से देश का आदिवासी समुदाय गुस्से में है। क्या राष्ट्रपति का पद उन्हें राजनीतिक प्रचार के लिए दिखाई पड़ता है। पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति को इस समारोह से पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा है। यह न केवल भारत के लोकतंत्र, बल्कि आदिवासी समुदाय का भी अपमान है। शिवाजीराव मोघे के मुताबिक, इस मुद्दे को सभी राज्यों में लोगों के बीच ले जा रहे हैं। आदिवासी समुदायों की जनसभाएं आयोजित कर उन्हें मोदी सरकार द्वारा किए गए राष्ट्रपति मुर्मू के अपमान की बात बताई जाएगी। आम आदमी पार्टी की ओर से भी यही बात कही गई है। 'आप' ने इसमें दलित व पिछड़े समुदायों को भी जोड़ दिया है। केजरीवाल ने कहा, ये दलित, पिछड़ों और आदिवासियों का अपमान है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, राहुल गांधी और केजरीवाल इस मुद्दे को 2024 तक भुना सकते हैं। जिस तरह भाजपा ने राम नाथ कोविंद और मुर्मू की नियुक्ति को भुनाया था, अब वैसे ही विपक्षी दल उनके अपमान को मुद्दा बना रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next