अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री
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अश्विनी वैष्णव ने रेल किराये पर कही यह बात
वैष्णव ने निचले सदन को एक लिखित उत्तर में बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 में यात्री यात्रा पर दी जाने वाली कुल सब्सिडी का अनंतिम अनुमान 60,466 करोड़ रुपये है। यह यात्री यात्रा की लागत पर 45% सब्सिडी के बराबर है। पांच साल से अधिक के अंतराल के बाद इस वर्ष 1 जुलाई से रेल किराये को तर्कसंगत बनाया गया है। किराए में वृद्धि बहुत कम है। यह प्रीमियम श्रेणियों के लिए आधे पैसे प्रति किमी से लेकर दो पैसे प्रति किमी तक है। साधारण द्वितीय श्रेणी में 500 किमी तक कोई किराया नहीं बढ़ाया गया है। इसके बाद प्रति यात्री प्रति किलोमीटर केवल आधा पैसा ही बढ़ाया गया है।
उन्होंने कहा कि स्लीपर श्रेणी, साधारण और प्रथम श्रेणी साधारण में प्रति यात्री प्रति किलोमीटर किराये में आधा पैसा, मेल एक्सप्रेस में गैर-वातानुकूलित श्रेणियों में प्रति यात्री प्रति किलोमीटर 1 पैसा और आरक्षित वातानुकूलित श्रेणियों में प्रति यात्री प्रति किलोमीटर 2 पैसे की वृद्धि की गई है। निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों की सामर्थ्य बनाए रखने के लिए मासिक सीजन टिकट (एमएसटी) और उपनगरीय यात्रा के किराए में संशोधन नहीं किया गया है। अनुमान है कि आधे से भी कम यात्राओं में किराये में मामूली वृद्धि होगी।
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट 2029 तक होगा पूरा : वैष्णव
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को संसद में बताया कि वापी और साबरमती के बीच मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट का गुजरात सेक्शन दिसंबर 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही पूरा 508 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट दिसंबर 2029 तक पूरा हो जाएगा।
वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट तकनीकी रूप से बहुत जटिल है। इसके पूरा होने का सटीक समय का पता तभी लगाया जा सकता है जब इससे जुड़े सभी निर्माण कार्य पूरे हो जाएं। मंत्री ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का निर्माण जापानी तकनीक से हो रहा है। इसके अंतर्गत मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद व साबरमती में 12 स्टेशनों को बनाने की योजना है। 30 जून 2025 तक इस प्रोजेक्ट पर कुल 78,839 करोड़ रुपये का खर्च हो चुका है। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये है। इसकी 81 प्रतिशत फंडिंग जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी, जबकि शेष 19 प्रतिशत भारत दे रहा है। इस 19 प्रतिशत फंडिंग में 50 प्रतिशत रेल मंत्रालय, 25-25 प्रतिशत फंडिंग महाराष्ट्र एवं गुजरात सरकारों द्वारा की जा रही है।
एनएच पर हादसों में 26,770 की हुई मौत
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि पिछले छह महीनों में राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) पर सड़क दुर्घटनाओं में 26770 लोगों की मौत हुई है। 2024 में 52,609 घातक दुर्घटनाएं हुई थीं। उन्होंने एक लिखित उत्तर में बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने उच्च यातायात घनत्व वाले एनएच और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ट्रांस-हरियाणा, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (एटीएमएस) स्थापित की है।
पांच वर्ष से कम उम्र के 37% बच्चे अविकसित
केंद्र सरकार ने बताया कि पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत पांच वर्ष से कम आयु के करीब 37.07 प्रतिशत बच्चे अविकसित पाए गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15.93 प्रतिशत बच्चों का वजन कम, जबकि 5.46 प्रतिशत दुर्बलता के शिकार हैं। राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में महिला व बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अविकसित बच्चों की दर सबसे अधिक 48.83 प्रतिशत है।
कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास से जुड़े निजी बिल पर होगी चर्चा
बीते करीब साढ़े तीन दशक से विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडितों के लिए न्याय की बड़ी उम्मीद जगी है। दरअसल, राज्यसभा में पहली बार उनके पुनर्वास मामले से जुड़े निजी विधेयक पर विचार होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसकी मंजूरी दे दी है।
गौरतलब है कि सांसद विवेक तन्खा ने बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में कश्मीरी पंडित (आश्रय, प्रतिपूर्ति, पुनर्वास और पुनर्स्थापन) विधेयक पेश किया था। नियमानुसार धन विधेयक से जुड़े विधेयकों पर विचार के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी है। राष्ट्रपति ने बीते मंगलवार को इस विधेयक पर विचार करने के लिए अपनी ओर से दिए अनुमोदन की जानकारी तन्खा को दी है। राज्यसभा सचिवालय ने भी बुधवार को इस बारे में नोटिस जारी किया।
तन्खा ने बताया कि अगर इस विधेयक का अनुमोदन होता है, तो यह कश्मीरी पंडितों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि अनुच्छेद 117 के खंड 3 के तहत राष्ट्रपति द्वारा वित्तीय निहितार्थ वाले बहुत कम विधेयकों की सिफारिश की जाती है। बता दें कि कश्मीर में आतंकवाद उभरने के बाद नब्बे के दशक से करीब 4.5 लाख लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं।