राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने उपसभापति हरिवंश नारायण के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को सोमवार को खारिज कर दिया और कहा कि प्रस्ताव उचित प्रारूप में नहीं था। ये अविश्वास प्रस्ताव 12 विपक्षी दलों के 100 सांसदों द्वारा पेश किया गया था।
सभापति ने कहा कि यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 90 के तहत गैर-स्वीकार्य है। उन्होंने सदन में इसकी घोषणा की। यह अनुच्छेद संसद के ऊपरी सदन के 'उपसभापति के कार्यालय से छुट्टी और इस्तीफे' से संबंधित है।
विपक्ष ने एक दिन पहले कृषि से संबंधित दो विधेयकों पर विपक्ष के संशोधनों पर मतविभाजन की मांग स्वीकार नहीं किए जाने को लेकर उपसभापति के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया था। कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 और कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 को ध्वनि मत के जरिए पास कर दिया गया।
यह भी पढ़ें: राज्यसभा में हंगामे पर कार्रवाई, संजय सिंह व ब्रायन सहित आठ विपक्षी सांसद निलंबित
वहीं, विपक्षी सांसद इसके विरोध में सदन के वेल तक पहुंच गए और इन विधेयकों को सेलेक्ट कमेटी को भेजे जाने की मांग की, ताकि इन पर समीक्षा की जा सके। विपक्षी सांसद उपसभापति हरिवंश के आसन की तरफ बढ़े। वे टेबल पर कूद पड़े और माइक को तोड़ दिया। वहीं, कुछ सांसदों ने पेपर भी फाड़े।
इसके बाद, मार्शल्स को बुलाया गया, जिन्होंने उपसभापति हरिवंश की सुरक्षा की और सांसदों को उनकी जगह पर वापस भेजा। विपक्षी दलों ने कहा कि कार्यवाही का सीधा प्रसारण म्यूट कर दिया गया था और मतपत्र से मतदान की उनकी मांग को खारिज कर दिया गया।
सदन स्थगित होने और अविश्वास प्रस्ताव का मसौदा तैयार होने तक विपक्षी दल राज्यसभा में बैठे रहे। इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, तेलंगाना राष्ट्र समिति, तृणमूल कांग्रेस, जनता दल (सेक्युलर), राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), आम आदमी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सांसद शामिल थे।