संसद के सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र से पहले सरकार को परिसीमन बिल और महिला आरक्षण विधेयक पर द्रमुक का साथ मिलने के संकेत मिले हैं। समर्थन के बदले द्रमुक ने ऐसी मांग रखी है, जिसका आश्वासन बजट सत्र में चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह पहले ही दे चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक द्रमुक ने सभी राज्यों में आनुपातिक आधार पर 50 फीसदी सीटें बढ़ाने की शर्त रखी है, जिस पर सरकार भी राजी दिख रही है। अगर यह गठबंधन हकीकत बदलता है, तो मोदी सरकार संसद में दो-तिहाई के जादुई आंकड़े (363) के बेहद करीब पहुंच जाएगी। इसके अलावा, राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़े प्रावधान वाला 'वंदे मातरम बिल' समेत पांच नए विधेयक भी इस सत्र में पेश होने जा रहे हैं, जिससे सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं।
रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक के बाद आरपीआई सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने भी दावा किया कि द्रमुक परिसीमन विधेयक पर सरकार का समर्थन करने को तैयार है। हालांकि, द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा ने इससे इन्कार किया। उन्होंने कहा, दक्षिण भारत के राज्यों के हित के खिलाफ पार्टी कोई समझौता नहीं करेगी। जहां तक परिसीमन की बात है तो हम सरकार से और स्पष्टता चाहते हैं। हालांकि सूत्रों का दावा है कि सब कुछ तय हो चुुका है। द्रमुक चाहती है कि सभी राज्यों का आनुपातिक रूप से 50 फीसदी सीटें बढ़ाने का प्रावधान बिल में जोड़ा जाए। सरकार यह करने को तैयार है। सर्वदलीय बैठक में सरकार ने अहम विधेयकों को पारित कराने के लिए विपक्ष का सहयोग मांगा है।
दो तिहाई बहुमत का गणित
लोकसभा सदस्यों की संख्या 544 है। दो तिहाई बहुमत के लिए सरकार को 363 वोट चाहिए। नई परिस्थिति में शिवसेना यूबीटी के 6 व एनसीपीआई के 20 सांसदों के समर्थन के साथ सरकार के पास आंकड़ा 324 हो जाता है। द्रमुक के पास 22 व एनसीपी (शरद पवार) के पास 8 सांसद हैं और इन दोनों ने एनडीए को समर्थन का संकेत दिया है। इस तरह यह संख्या 354 हो जाती है, जो दो तिहाई बहुमत से 9 कम है।
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नौ सांसदों की कमी पूरी करने की कोशिश
सरकार पर्याप्त संख्या बल के लिए वाईएसआरसीपी के साथ यूपीपीएल समेत पूर्वोत्तर के दो दलों के संपर्क में है, जिनके पास कुल आठ सांसद हैं। इससे सरकार जादुई आंकड़े से सिर्फ एक कम रह जाएगी। सात निर्दलियों में एक का भी साथ या इंजीनियर राशिद अथवा अमृतपाल सिंह की अनुपस्थिति इसे पूरा कर सकती है।
पांच नए विधेयक होंगे पेश, आज वंदे मातरम बिल
आयकर (संशोधन) विधेयक : सरकारी अध्यादेश की जगह लेने के लिए यह विधेयक लाया जा रहा। इसका मकसद विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना और सरकारी कर्ज बाजार को मजबूत करना है।
सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक : शीर्ष न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़े अध्यादेश को स्थायी कानून में बदला जा सकेगा।
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक : यह राष्ट्रगीत वंदे मातरम का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी और दंडात्मक प्रावधान वाला विधेयक है। गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में इसे पेश करेंगे।
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक : इस विधेयक को लाने का उद्देश्य भुगतान में देरी से संबंधित विवादों का तेजी से निपटारा करना है।