केंद्र सरकार ने आज कहा कि असम के सिलचर हवाईअड्डे पर टीएमसी सांसदों को कानून व्यवस्था की स्थिति का ध्यान रखते हुए रोका गया था और पार्टी के जनप्रतिनिधियों की तरफ से अशोभनीय बर्ताव भी किया गया था।
तृणमूल कांग्रेस ने असम में पार्टी के सांसदों को हवाईअड्डे परे रोके जाने पर देश में ‘अघोषित आपातकाल’ होने का आरोप लगाया है। लोकसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे पर जवाब देते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि असम सरकार को मीडिया और खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली थी कि तृणमूल कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों के आने से कानून व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए सिलचर हवाईअड्डे पर पहुंचे टीएमसी के जनप्रतिनिधियों से जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने हाथ जोड़कर अनुरोध किया कि धारा 144 लागू होने की वजह से उनका हवाईअड्डे से बाहर जाना ठीक नहीं है।
गृह मंत्री ने कहा कि उपायुक्त (डीसी) ने कल दोपहर 1:55 बजे सिलचर हवाईअड्डे पर उतरे तृणमूल सांसदों, विधायकों की यथोचित प्रोटोकॉल के साथ अगवानी की और निषेधाज्ञा का उल्लेख करते हुए उनसे वापस जाने का अनुरोध किया।
सिंह ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के पूरे जनप्रतिनिधि मंडल को वैसा ही सम्मान दिया गया जैसा जनप्रतिनिधियों को दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने सिलचर हवाईअड्डे पर अधिकारियों के साथ बहस की और उन्होंने अशोभनीय स्थिति भी पैदा की जहां धक्कामुक्की में हवाईअड्डे की दो महिला सुरक्षाकर्मी चोटिल हुईं और साथ ही अन्य यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि बाद में कोलकाता और दिल्ली की कोई उड़ान नहीं होने और तृणमूल सांसदों के वापस नहीं जाने पर उन्हें सीआरपीसी की धारा 151 के तहत हिरासत में लिया गया और उनके लिखित अनुरोध पर रात को हवाईअड्डे के विश्रामगृह में ठहराया गया।
सिंह ने कहा कि कोलकाता जाने वाले प्रतिनिधिमंडल के सदस्य आज सुबह 7:40 बजे की उड़ान से रवाना हो गये और दिल्ली जाने वाले दोपहर को 2:20 की उड़ान से रवाना होंगे।
इससे पहले शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि एनआरसी के मुद्दे पर सिलचर में लोगों से बातचीत करने और स्थिति का आकलन करने पहुंचे पार्टी के छह सांसदों को असम पुलिस ने हवाईअड्डे से निकलने नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि पार्टी की लोकसभा सदस्य काकोली घोष दस्तीदार, ममता ठाकुर, रत्ना डे नाग और अर्पिता घोष तथा राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय एवं नदीमुल हक ने अधिकारियों से कहा कि हम कोई जनसभा करने नहीं केवल हालात का आकलन करने जा रहे हैं, लेकिन असम पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की।
असम से भाजपा सांसद विजया चक्रवर्ती ने कहा कि असम में धारा 144 लगी होने के साथ पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल है लेकिन तृणमूल कांग्रेस सांसद माहौल बिगाड़ने के लिए वहां गये। चक्रवर्ती ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में गृह युद्ध हो सकता है। उन्हें माहौल बिगाड़ने का प्रयास करने के लिए गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
कांग्रेस के गौरव गोगोई ने कहा कि असम के लोग इस नाजुक समय में धैर्य दिखा रहे हैं, ऐसे में उत्तेजक भाषणों से कुछ नहीं होगा। कांग्रेस के ही अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि भड़काऊ भाषण नहीं दिये जाने चाहिए। गृह युद्ध के हालात कहीं नहीं हैं। जबरदस्ती ऐसे हालात पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
असम के कोकराझार से निर्दलीय सांसद नभ कुमार सरनिया ने कहा कि उनके क्षेत्र के तीन लाख लोगों का नाम एनआरसी में नहीं आया है लेकिन लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अंतिम सूची में उनका नाम आएगा।