राज्यसभा में मंगलवार को खनिज और खदान (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2025 पर चर्चा शुरू हुई। यह विधेयक देश में खनन से जुड़े नियमों को आसान बनाने और खासतौर पर महत्वपूर्ण खनिजों के खनन के लिए नई व्यवस्था तैयार करने का लक्ष्य रखता है। यह विधेयक पहले ही लोकसभा से पारित हो चुका है और अब ऊपरी सदन में विचार के लिए लाया गया। विपक्ष ने इस दौरान बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन सभापति घनश्याम तिवारी ने स्पष्ट कर दिया कि सदन में केवल इस विधेयक पर चर्चा होगी। इसके बाद विपक्ष ने नारेबाजी की और वॉकआउट कर दिया।
कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने विधेयक को सदन में पेश करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में खनन क्षेत्र में काफी बदलाव आया है और यह संशोधन आगे और सुधार लाएगा। उन्होंने कहा कि चाहे खनिज ब्लॉकों की नीलामी हो या खोज कार्य, यह विधेयक देश में एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला तैयार करेगा। मंत्री ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद 2015 तक खनिजों की खोज ठीक से नहीं हो पाई थी। केवल भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग इस कार्य को करता था। 2015 में नेशनल मिनरल डेवलपमेंट एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट बनाया गया और अब इस विधेयक से और पारदर्शिता आएगी।
विपक्ष ने राज्यों के अधिकारों पर उठाए सवाल
विधेयक पेश होने पर सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने आपत्ति जताई और कहा कि यह राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने दलील दी कि भूमि राज्य का विषय है, इसलिए केंद्र को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। एआईएडीएमके सांसद एम. थंबीदुरई ने भी इसी मुद्दे को उठाया और कहा कि यह विधेयक राज्यों के अधिकारों पर असर डालेगा। हालांकि, विपक्ष की आपत्तियों को सदन की कुर्सी ने खारिज कर दिया।
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समर्थन और आलोचना दोनों
भाजपा सांसद भीम सिंह ने विधेयक को सरकार के सुधारों की एक और कड़ी बताया। वाईएसआर कांग्रेस के सांसद अयोध्या रामी रेड्डी ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि यह विधेयक जरूरी खनिजों की खोज और उत्पादन को बढ़ावा देगा, जिससे भारत आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल कर सकेगा। बीजू जनता दल के सांसद मानस रंजन मंगराज ने हालांकि चिंता जताई कि इस विधेयक में खनन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को दूर करने का कोई ठोस प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि ओडिशा जैसे राज्यों में खनिज संपदा वरदान की बजाय अभिशाप साबित हो रही है। खनन से प्रदूषण और क्षति बढ़ रही है, लेकिन इन जिलों को उनका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा।
भारत की आत्मनिर्भरता के लिए अहम कदम
शिंदे वाली शिवसेना के सांसद मिलिंद देवड़ा ने इस विधेयक को भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ खनन नीति में सुधार नहीं है बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है। कुल मिलाकर, खनिज और खदान संशोधन विधेयक, 2025 को लेकर संसद में सियासी घमासान देखने को मिला। विपक्ष ने इसे राज्यों के अधिकारों पर चोट बताया, तो सरकार और उसके सहयोगियों ने इसे आत्मनिर्भर भारत की नींव करार दिया।
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महाराष्ट्र की को-ऑपरेटिव सोसायटियों के लिए लिक्विडेटर नियुक्त
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि महाराष्ट्र की चार मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटियों जिजाऊ, ज्ञानराधा, शुभ कल्याण और राजस्थानी की परिसंपत्तियों के परिसमापनके लिए लिक्विडेटर नियुक्त कर दिए गए हैं। शाह ने कहा कि यह कदम सदस्यों को समयबद्ध तरीके से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। ये सोसायटियां “निर्दिष्ट मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी” की श्रेणी में नहीं आतीं, इसलिए इनके लिए प्रशासक नियुक्त नहीं किए जा सकते।
उन्होंने बताया कि शिकायतों के आधार पर केंद्रीय रजिस्ट्रार ने महाराष्ट्र सरकार के रजिस्ट्रार से जांच कराई। जांच रिपोर्टों के बाद आपत्तियां मांगी गईं, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम, 2002 की धारा 86 के तहत विंडिंग-अप आदेश पारित कर दिए गए। इसके बाद धारा 89 के तहत लिक्विडेटर नियुक्त किए गए। शाह ने कहा कि जमाकर्ताओं और सदस्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए 2023 में संशोधित अधिनियम और नियमों के माध्यम से कई प्रावधान जोड़े गए हैं।