कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने कहा, भाजपा सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुद को दूर नहीं कर सकती। भाजपा अगर इस फैसले से संतुष्ट नहीं है तो उसे इस पर बयान देना चाहिए और इसे सुधारने के कदम उठाने चाहिए। चिदंबरम ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा।
भाजपा दलितों के अधिकार कमजोर कर रही: प्रियंका
‘भाजपा सरकार संविधान द्वारा दलितों व आदिवासियों को दिए गए समानता के अधिकार को कमजोर कर रही है। वह आरक्षण को खत्म करना चाहती। संघ के लोग लगातार इसके खिलाफ बयान देते हैं। उत्तराखंड में भाजपा सरकार आरक्षण खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाती है। यूपी सरकार भी आरक्षण नियमों से छेड़छाड़ कर रही है। - प्रियंका वाड्रा, कांग्रेस महासचिव
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आरएसएस खुश हो सकता है, मगर दलित और आदिवासी निराश: माकपा
वामपंथी पार्टी माकपा ने सोमवार को कहा है कि प्रमोशन में आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आरएसएस भले ही खुश हो, मगर दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग बेहद निराश और आक्रोशित है। एक बयान में माकपा ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरियों के मामले में समान अवसर मुहैया करने की जिम्मेदारी तय करता है। यह अनुच्छेद सरकार को पिछड़े वर्ग के नागरिकों के पक्ष में नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिए कोई प्रावधान करने से नहीं रोकता है, जो जो सरकार की राय में, राज्य के तहत सेवाओं में पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं करता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर राज्यसभा में विपक्ष की ओर दिए तीन नोटिस पर सभापति एम.वैंकेया नायूड ने विषय को संक्षिप्त रूप में कार्यवाही में शामिल करने की इजाजत तो दी लेकिन इस पर किसी प्रकार की चर्चा और टिप्पणी से इंकार कर दिया। बावजूद विपक्षी दलों के नेता इस मुद्दे पर अपनी बात कहना चाहते थे लिहाजा सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच कहासुनी और शोर-शराबा भी हुआ।
सभापति ने पूर्व में ही सदस्यों से स्पष्ट किया कि बजट पर चर्चा के लिए ही सोमवार को प्रश्रकाल और अन्य कामकाज स्थगित किया है। ऐसे में उन्हें सीपीएम के केके.रागेश, कांग्रेस के पीएल.पुनिया और सीपीआई के बिनय विश्वम की ओर से नोटिस मिले हैं। उन्होंने केके.रागेश से विषय को मात्र शामिल करने की इजाजत दी।
केके.रागेश अपनी बात कहने खड़े हुए तो सत्तापक्ष की ओर से शोरशराबा शुरू हो गया।
विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मैं सदन को डिस्टर्ब नहीं करूंगा एक मिनट में बात कहूंगा। उन्होंने कहा कि पहली बार किसी राज्य सरकार उत्तराखंड सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि एससी-एसटी आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एससी-एसटी को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। इसी बीच हंगामा शुरू हो गया। तभी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेड़कर कुछ कहने को खड़े हुए लेकिन दोनों ओर से हो रहे हंगामे में उनकी आवाज दब गई।
आजाद और जावेड़कर अपनी-अपनी बात कहना चाहते थे लेकिन सभापति ने इतने विस्तार में नहीं जाना है। उन्होंने कहा कि मैंने इस विषय पर चर्चा की अनुमति नहीं दी है। इसमें अभी हम लोगों ने कोई मोशन एडमिट नहीं किया है। हंगामे के बीच बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, कांग्रेस के बीके.हरिप्रसाद और पीएल.पुनिया भी खड़े होकर अपनी बात कहने लगे। सपा के प्रो.राम गोपाल ने कहा कि ये बहुत गंभीर मामला है। पीएल.पुनिया अपने नोटिस का हवाला देकर कुछ कहना चाह रहे थे जिसे अनुमति नहीं दी।
इसी बीच सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद्र गहलोत ने सदन को जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट 7 फरवरी के फैसले के तारतम्य में जो विषय अभी सदन में उठाया गया है। सरकार इस फैसले पर गंभीरता से विचार कर रही है और सरकार दोपहर में इस पर जवाब देगी। मंत्री के बयान और सभापति के हस्तक्षेप के बाद बजट पर चर्चा शुरू हुई।
प्रमोशन में आरक्षण मामले में शुक्रवार को दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिहार सरकार ने शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर की है। सरकार ने कहा है कि इससे संबंधित मामला शीर्ष अदालत में लंबित होने के कारण वह राज्य में एससी-एसटी वर्ग के लोगों को प्रमोशन में आरक्षण नहीं दे पा रही है। इसी दौरान केंद्र सरकार ने भी कोर्ट से कहा कि उनकी अपील भी लंबित है, जिसके चलते एक लाख से अधिक कर्मियों का प्रमोशन रुका है।
बिहार सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ से कहा कि शीर्ष अदालत ने गर्त वर्ष 15 अप्रैल को इस मामले में यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया था, जिससे वह कर्मियों को प्रमोशन में आरक्षण नहीं दे पा रही है। उन्होंने अदालत से 15 अप्रैल 2019 से पहली की स्थिति बहाल करने की गुहार की। इस पर अदालत ने नोटिस जारी कर सुनवाई चार हफ्ते के लिए टाल दी।
वहीं, महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने सीजेआई एसए बोबडे की पीठ को बताया कि राज्य में अनारक्षित श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई लेकिन आरक्षित श्रेणी के एससी और एसटी कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं दी गई है। कोर्ट इस पर दो हफ्ते बाद सुनवाई करेगा। वरिष्ठ वकील पीएस पटवालिया ने भी झारखंड सरकार की ओर से ऐसा ही मामला उठाया।