संसद के गलियारे से एक बड़ी खबर आई है। दरअसल, लोकसभा और राज्यसभा की उस संयुक्त समिति का शुक्रवार को पुनर्गठन कर दिया गया है, जो सांसदों के वेतन और भत्तों से जुड़े मामलों की देखरेख करती है। यह समिति हर साल गठित की जाती है और इसमें लोकसभा-राज्यसभा दोनों के सदस्य शामिल होते हैं।
ओम बिरला और सीपी राधाकृष्णन ने किए नाम तय
लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इस पैनल के लिए सदस्यों को नामित किया है। समिति के अध्यक्ष का चुनाव वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954' के प्रावधानों के तहत किया जाता है।
15 में से 14 सदस्यों का नामांकन, एक पद खाली
सांसदों के वेतन और भत्तों पर बनी इस संयुक्त समिति में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें से 10 सदस्य लोकसभा से और 5 सदस्य राज्यसभा से लिए जाते हैं। वर्तमान पुनर्गठन में 14 सदस्यों को नामित कर दिया गया है, जबकि एक पद अभी भी रिक्त है। इस समिति का कार्यकाल एक वर्ष से अधिक का नहीं होता है। यह एक वैधानिक स्थायी समिति है, जिसका गठन 1954 के अधिनियम की धारा नौ के तहत किया गया है। यह समिति सांसदों के वेतन, दैनिक भत्तों, आवास व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य सुविधाओं से संबंधित नियमों को बनाने और उन्हें विनियमित करने का महत्वपूर्ण कार्य करती है।
प्राक्कलन समिति ने जारी की मुद्दों की सूची
दूसरी ओर संसद की सबसे महत्वपूर्ण समितियों में से एक प्राक्कलन समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए अपने जांच विषयों का चयन कर लिया है। समिति ने शासन के विभिन्न पहलुओं और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए कुल 15 मुख्य विषयों की सूची जारी की है। इस समीक्षा के दायरे में ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रेलवे जैसे प्रमुख मंत्रालय शामिल होंगे।
रेलवे सुरक्षा और उड़ान योजना पर विशेष नजर
समिति की ओर से जारी सूची के अनुसार, भारतीय रेलवे में नई परियोजनाओं और यात्री सुरक्षा उपायों की गहन समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत हवाई अड्डों के समग्र विकास और उड़ान योजना के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। रेलवे के आधुनिकीकरण की योजना भी समिति के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल है।