संसद के हंगामे पर भाजपा ने विपक्ष को घेरा है। नितिन नवीन ने इसे ‘अराजक मानसिकता’ बताया, जबकि अमित शाह ने चर्चा के लिए सरकार की तैयारी दोहराई। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत से सदन में गतिरोध खत्म होगा।
संसद में जारी गतिरोध को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को विपक्ष पर संसद की कार्यवाही जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहा हंगामा विपक्ष की ‘अराजक मानसिकता’ को दिखाता है। नवीन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। इसके बावजूद विपक्ष सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है। उन्होंने कहा कि अब जनता देख रही है कि चर्चा से वास्तव में कौन भाग रहा है।
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क्या विपक्ष जानबूझकर सदन नहीं चलने दे रहा?
नितिन नवीन ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से बार-बार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कराने की कोशिश की जा रही है। लेकिन विपक्षी दल हंगामा कर रहे हैं और कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। विपक्ष को भी अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। लेकिन सदन को बाधित करने से चर्चा का रास्ता बंद हो रहा है।
नवीन ने अपने बयान में कहा कि संसद में विपक्ष का लगातार व्यवधान उसके ‘अराजक मानसिकता’ को उजागर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब सब कुछ देख रही है और उसे पता चल रहा है कि चर्चा से कौन बच रहा है।
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अमित शाह ने विपक्ष को क्या प्रस्ताव दिया?
संसद में जारी टकराव के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। शाह ने सोशल मीडिया पर कहा कि सरकार संसद में हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर चर्चा की मांग करने को कहा। अमित शाह ने यह भी कहा कि सरकार बुधवार दोपहर तीन बजे से गुरुवार दोपहर तीन बजे तक इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब संसद में लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित हो रही है।
क्या हंगामे के बीच संसद का कामकाज प्रभावित हो रहा है?
संसद में सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं। बार-बार होने वाले व्यवधान के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई है। इससे विधायी कामकाज भी सीमित रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत से गतिरोध टूटेगा या संसद में टकराव आगे भी जारी रहेगा?