राज्यसभा में गुरुवार को झारखंड जैसे राज्यों में मातृत्व स्वास्थ्य योजनाओं की कमी का मुद्दा उठा। एक सांसद ने सदन में उत्तर प्रदेश में रेलवे क्रॉसिंग पर इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और इसके चलते भारी जाम लगने की समस्या का मुद्दा उठाया। शून्य काल के दौरान भाजपा सांसद संगीत बलवंत ने कहा कि रेलवे क्रॉसिंग पर देर तक गेट बंद होने के चलते जाम की समस्या पैदा होती है, जिससे हर रोज हजारों लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर ओवरब्रिज बनाने की मांग की।
झामुमो की सांसद महुआ माझी ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को लेकर चिंता जाहिर की। इस योजना का उद्देश्य गर्भावस्था के खतरों और गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की मौतों की संख्या को कम करना है। झामुमो सांसद ने कहा कि कई राज्यों को इस योजना के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टर और अन्य सुविधाएं मिली हैं, लेकिन झारखंड जैसे राज्य अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। सांसद ने केंद्र से योजना के तहत संसाधनों के समान वितरण की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि मातृत्व की सुरक्षा किसी राज्य या पार्टी की चिंता नहीं है ब्लकि यह संविधान के तहत मिला सामाजिक न्याय का सवाल है।
पीएम और मुख्यमंत्रियों को हटाने वाले विधेयकों पर संसदीय समिति को समय बढ़ा
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने से जुड़े विधेयकों की जांच कर रही संसदीय समिति को अपनी रिपोर्ट देने के लिए और समय मिल गया है। गुरुवार को लोकसभा में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने लोकसभा में प्रस्ताव रखा कि समिति को बजट सत्र 2026 के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक रिपोर्ट सौंपने की अनुमति दी जाए। यह प्रस्ताव ध्वनिमत से पास हो गया। आमतौर पर बजट सत्र अप्रैल के पहले सप्ताह में समाप्त होता है। समिति का मौजूदा कार्यकाल जल्द खत्म होने वाला था, जबकि अब तक उसकी सिर्फ एक ही बैठक हो पाई है।
यह संयुक्त समिति संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही है। इस महीने की शुरुआत में समिति ने उन राजनीतिक दलों को भी आमंत्रित करने का फैसला किया था, जिन्होंने अब तक बैठकों का बहिष्कार किया है। कई विपक्षी दलों का कहना है कि ये विधेयक दोष सिद्ध होने तक निर्दोष माने जाने के कानूनी सिद्धांत के खिलाफ हैं। उनका आरोप है कि गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के बाद अगर एक महीने के भीतर जमानत नहीं मिलती, तो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को अपने आप पद से हटा दिया जाएगा, जो गलत है।