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संसद डायरी: 'डीजीसीए ने 352 एयरलाइन को जारी किया नोटिस'; नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री ने राज्यसभा में दी जानकारी

Mon, 09 Feb 2026 07:38 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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संसद डायरी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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नागरिक उड्डयन नियामक (डीजीसीए) ने पिछले दो वर्षों में 352 शो कॉज नोटिस विभिन्न एयरलाइंस को जारी किए हैं। यह जानकारी राज्यसभा में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने दी।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो और एयर इंडिया ने सबसे अधिक नोटिस प्राप्त किए हैं। इंडिगो को 98 और एयर इंडिया को 84 नोटिस मिले। अन्य एयरलाइंस में एयर इंडिया एक्सप्रेस को 65, स्पाइस जेट को 45, अकासा एयर को 17 और अलग-अलग अन्य एलायंस को 43 नोटिस शामिल हैं।

डीजीसीए ने 352 नोटिसों में से 139 पर जुर्माना, 113 को चेतावनी और केवल 7 का संतोषजनक जवाब स्वीकार किया।हालांकि, मंत्रालय ने एयरलाइन के हिसाब से कार्रवाई की विस्तृत जानकारी नहीं दी। डीजीसीए के पास एयरलाइंस के विमान सम्मिलन, समय पर उड़ान प्रदर्शन और मार्ग समायोजन की निगरानी के लिए मजबूत तंत्र है। इस साल 31 जनवरी तक, एयरलाइंस ने कुल 8 नए विमान शामिल किए हैं, जिनमें 1 वाइड-बॉडी और 7 नैरो-बॉडी विमान हैं।
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2024-25 में भारतीय एयरलाइंस को 5,289.73 करोड़ का घाटा
पिछले वित्तीय वर्ष में भारतीय एयरलाइंस का कुल घाटा 5,289.73 करोड़ रुपये रहा। इसमें से अकेले एअर इंडिया समूह का घाटा 9,808.12 करोड़ रुपये था। 11 ऑपरेटरों में से चार ने लाभ दर्ज किया, जिसमें इंडिगो, ब्लू डार्ट, स्टार एयर और इंडियावन एयर शामिल हैं। राज्यसभा में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने एक लिखित उत्तर में बताया कि 2024-25 में एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने क्रमशः 3,975.75 करोड़ और 5,832.37 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया, जबकि अकासा एयर ने 1,986.25 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया।

ओपीएस से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा गंभीर असर
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद को बताया कि बिना निधि वाली वृद्धावस्था पेंशन योजना (ओपीएस) से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव पड़ने की संभावना है। इससे राज्यों के पूंजीगत व्यय सीमित हो सकते हैं और दीर्घकालिक अंतर-पीढ़ीगत वित्तीय देनदारियां बढ़ सकती हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारें राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) छोड़ ओपीएस अपना लिया है।

ईपीएस-95 के तहत 47.04 लाख लोगों को मिल रही 9000 से कम पेंशन
देश में कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के तहत 47.04 लाख पेंशनभोगियों को 9,000 रुपये से कम पेंशन मिल रही है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के डैशबोर्ड के अनुसार, ईपीएस-95 के तहत वर्तमान पेंशनभोगियों की कुल संख्या 82,11,182 है। श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने सोमवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में कहा, ईपीएस-95 के तहत 9,000 रुपये से कम पेंशन प्राप्त करने वाले सक्रिय पेंशनभोगियों की कुल संख्या 47,04,270 है। विभिन्न हितधारकों से इस योजना के तहत न्यूनतम पेंशन को मौजूदा 1,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाने के लिए अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं।

कांग्रेस की महिला सांसदों का स्पीकर को पत्र, सरकार के दबाव में सदन की गरिमा गिराने का लगाया आरोप
कांग्रेस की महिला सांसदों ने सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर उन पर सरकार के दबाव में सदन की गरिमा गिराने का आरोप लगाया है। प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य महिला सांसदों की ओर से लिखे गए इस पत्र में कहा गया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देने पीएम नरेंद्र मोदी खुद भय के कारण नहीं आए, मगर आसन ने सरकार के इशारे पर महिला सांसदों पर तथ्यहीन और गंभीर आरोप लगाए।

महिला सांसदों ने यह पत्र विपक्षी गठबंधन की ओर से स्पीकर बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी के बीच लिखा है। पत्र में कहा गया, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्तारूढ़ दल ने इस सदन के सांविधानिक संरक्षक के रूप में आपको विपक्ष की महिला सांसदों विशेषकर कांग्रेस की सांसदों के विरुद्ध झूठे, निराधार व मानहानिकारक आरोप लगाने के लिए मजबूर किया। हमें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि हमने पीएम मोदी की जनविरोधी सरकार के खिलाफ लगातार आवाज उठाई है और उनसे जवाबदेही की मांग की है। पत्र में आसन की ओर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का अवसर न देने और उसी आसन की ओर से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को अमर्यादित बातें कहने की इजाजत देने पर भी रोष जताया गया है।

पत्र में लिखा-पीएम मोदी में विपक्ष का सामना करने का साहस नहीं
भय के चलते सदन में नहीं आए प्रधानमंत्री : विपक्षी महिला सांसदों ने पत्र में लिखा- प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति किसी भय के कारण नहीं थी, वह सिर्फ इस डर के कारण सदन में नहीं आए कि उनमें विपक्ष का सामना करने का साहस नहीं था।

स्पीकर से मिले अमित शाह, सदन में अमर्यादित घटनाओं पर चिंतित
नेता प्रतिपक्ष राहुल के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। दोनों के बीच सदन का गतिरोध दूर करने को लेकर बातचीत हुई। सूत्रों का कहना है कि शाह ने कहा कि विपक्ष ही नहीं चाहता कि सदन चले। शाह ने स्पीकर के समक्ष सदन में हुई अमर्यादित घटनाओं पर भी चिंता जताई। 

तृणमूल ने नहीं खोले पत्ते
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर तृणमूल ने अपना रुख साफ नहीं किया है। वहीं, एनसीपी (शरद) प्रस्ताव लाए जाने के पक्ष में नहींं है।

दिल्ली एम्स पर बोझ व रायबरेली एम्स में अव्यवस्था का उठा मुद्दा
राजद के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने सोमवार को दिल्ली एम्स पर अत्यधिक बोझ और देश के अन्य चिकित्सा संस्थाओं में अव्यवस्था का मुद्दा उठाया। राजद सांसद ने कहा कि अन्य संस्थानों में चिकित्सा सुविधाएं कमजोर होने के कारण दिल्ली एम्स पर बोझ बढ़ रहा है। वहीं, कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने रायबरेली एम्स का मुद्दा उठाया। कहा कि 12 साल बाद भी परिचालन पूर्ण नहीं हुआ है।

703 कंपनियों पर 55.49 करोड़ से अधिक का जुर्माना
चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में सरकार ने कानून का उल्लंघन करने पर 703 कंपनियों पर कुल 55.49 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया। कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने लोकसभा को लिखित जवाब कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का पालन न करने में वृद्धि का कोई संकेत नहीं है। पिछले वित्त वर्ष में कुल 1,066 कंपनियों पर 109 करोड़ रुपये का जुर्मान लगाया गया था। चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में 7.51 करोड़ रुपये जुर्माना वसूला गया।

द्रमुक सांसद ने गोयल के खिलाफ दिया विशेषाधिकार हनन का नोटिस
द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा ने सोमवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। यह नोटिस संसद सत्र के दौरान गोयल की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विवरण साझा करने पर दिया गया। शिवा ने कहा, संसद सत्र के दौरान मंत्री ने सरकार के नीति निर्णय पर मीडिया में बयान दिया। यह इस सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन है। नोटिस पर राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि वह मामले की जांच करेंगे। मंत्री ने सदन में पहले ही बयान दिया है।

शिशु आहार, सॉफ्ट ड्रिंक्स में अतिरिक्त चीनी पर सख्ती बरतें, कड़ी निगरानी हो- अनुराग
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने शिशु आहार और सॉफ्ट ड्रिंक में अतिरिक्त चीनी पर चिंता जताते हुए सख्त निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं, खासकर बच्चों की सेहत के लिए व्यापक, अधिक स्पष्ट और प्रभावी फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग नियम लागू किया जाए। अनुराग ठाकुर ने सोमवार को लोकसभा में वैश्विक स्वास्थ्य मानकों का हवाला देते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों और बच्चों के लिए कुल ऊर्जा सेवन में मुक्त शर्करा को 10 प्रतिशत से कम रखने की सिफारिश करता है। वह आदर्श रूप से इसे 5 प्रतिशत से कम और शिशु आहार में किसी भी अतिरिक्त चीनी का इस्तेमाल न करने की सलाह देता है। लेकिन भारत में कुछ डिब्बाबंद शिशु आहार में प्रति सर्विंग लगभग 2.7 ग्राम अतिरिक्त चीनी होती है, जबकि कई लोकप्रिय सॉफ्ट ड्रिंक्स में प्रति 100 मिलीलीटर लगभग 10.6 ग्राम चीनी होती है। उन्होंने कहा कि अधिक चीनी बचपन के मोटापे, कम उम्र में डायबिटीज और युवाओं में अन्य रोगों को बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि पैकेजिंग पर चित्रात्मक चेतावनी या स्टार-आधारित रेटिंग शामिल होना चाहिए, जो चीनी, नमक और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वसा की उच्च मात्रा को स्पष्ट रूप से उजागर करें।

74 दिनों के लिए पर्याप्त तेल भंडार
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि किसी भी वैश्विक संकट या उथल-पुथल की स्थिति में भारत के पास 74 दिनों की मांग पूरी करने लायक रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद है।
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए पुरी ने कहा, भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, इसलिए उसके पास सुरक्षित और मजबूत तेल भंडार होना जरूरी है, ताकि वैश्विक संकट के समय देश कमजोर स्थिति में न आए। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक संकट की स्थिति में देश के पास पर्याप्त तेल उपलब्ध रहे। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, 90 दिनों का भंडार आदर्श माना जाता है। फिलहाल आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भूमिगत भंडार हैं और ओडिशा में भी जल्द शुरुआत की उम्मीद है। देश की रिफाइनिंग क्षमता करीब 260 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जिसे 320 मिलियन मीट्रिक टन किया जा रहा है।
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लोकसभा की घटनाओं पर राज्यसभा में हंगामा विपक्ष का वॉकआउट
राज्यसभा में सोमवार को लोकसभा की हाल की घटनाओं पर जमकर हुआ, जहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अपनी बात पूरी करने की अनुमति नहीं मिली थी। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, राहुल को बोलने से रोका गया। हम केवल संविधान संबंधी मुद्दे उठा रहे हैं। संसद में राज्यसभा और लोकसभा दोनों शामिल हैं और संविधान इन्हें मान्यता देता है। हालांकि, सभापति सीपी राधाकृष्णन ने खरगे को लोकसभा की घटनाओं पर बोलने की अनुमति नहीं दी और कहा कि कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जाएगा।
लोकसभा में बीते मंगलवार को राहुल को पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे की अप्रकाशित किताब से उद्धरण देने की अनुमति नहीं दी गई। तभी से हंगामा जारी है। इस विवाद में आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किया जा चुका है। हंगामे के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में उपस्थित नहीं हुए और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की महिला सांसदों की ओर से कुछ अप्रत्याशित घटना की जा सकती थी। इन्हीं मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है।
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