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Parliament Diary: परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी का बिल पेश; PM संग्रहालय से नहीं गायब हुआ कोई दस्तावेज

Tue, 16 Dec 2025 01:31 AM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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संसद की फाइल तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से संबंधित कोई दस्तावेज गायब नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद को यह जानकारी दी। सांसद संबित पात्रा के एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में बताया कि पीएमएमएल के 2025 में हुए वार्षिक निरीक्षण के दौरान नेहरू से जुड़ा कोई भी दस्तावेज लापता नहीं पाया गया है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि संस्थान में दस्तावेजों का कोई वार्षिक ऑडिट नहीं होता है। पीएमएमएल (पूर्व में एनएमएमएल) तीन मूर्ति भवन में स्थित है। यह बयान उन अटकलों को विराम देता है, जिनमें दस्तावेज गायब होने की बात कही जा रही थी।
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देशभर में ASI के अधीन 52 साइट म्यूजियम- सरकार
केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद को बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के प्रशासनिक नियंत्रण में देशभर में कुल 52 पुरातात्विक साइट म्यूजियम हैं। इनमें से नौ म्यूजियम वर्ष 2016 से 2024 के बीच खोले गए हैं। लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के कपिलवस्तु स्थित पिपरहवा साइट म्यूजियम और दिल्ली में हुमायूं का मकबरा विश्व धरोहर स्थल म्यूजियम हाल के वर्षों में शुरू किए गए प्रमुख म्यूजियम हैं।

सांसदों ने सरकार से राज्यवार और केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार म्यूजियम की जानकारी मांगी थी। इसके साथ ही राजस्थान, विशेषकर पाली लोकसभा क्षेत्र और कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ इलाके में नए म्यूजियम और अनुभवात्मक स्थलों की प्रगति पर भी सवाल पूछा गया था।

सरकार ने बताया कि दिल्ली में एएसआई के अधीन सबसे अधिक, कुल नौ साइट म्यूजियम हैं। इनमें पुराना किला और लाल किला प्रमुख हैं। लाल किले में आजादी से जुड़े कई गैलरी बनाई गई हैं, जैसे '1857- भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम', 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौजट, और 'आजादी के दीवाने'। संस्कृति मंत्रालय का कहना है कि इन म्यूजियमों का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण नहीं, बल्कि लोगों को इतिहास से जोड़ना और नई पीढ़ी में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाना है।

विपक्ष ने दल-बदल विरोधी कानून में सुधार की मांग उठाई
राज्यसभा में सोमवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों ने दल-बदल विरोधी कानून में सुधार की जोरदार मांग की। सदस्यों ने कहा कि लोकतंत्र में सबसे अहम चीज जनता का जनादेश होता है और उसे हर हाल में सम्मान मिलना चाहिए। बीआरएस सांसद केआर सुरेश रेड्डी ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों का अपने वादों से मुकर जाना और दल बदलना, मतदाता के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि वोट डालने के बाद मतदाता की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, बल्कि असली परीक्षा चुनाव के बाद शुरू होती है।

रेड्डी ने कहा कि आज स्थिति यह है कि चुनाव खत्म होते ही राजनीतिक ड्रामा शुरू हो जाता है। खासकर छोटे राज्यों में, जहां विधायकों की संख्या कम होती है, वहां दल-बदल आम बात बन गई है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से एंटी-डिफेक्शन कानून को मजबूत बनाने की मांग कर रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि संसद की एक स्थायी समिति बनाई जाए, जो लगातार दल-बदल के मामलों पर नजर रखे और कानून को ज्यादा सख्त बनाने के उपाय सुझाए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह पूरी तरह संसदीय मामला है, तो सुप्रीम कोर्ट को इसमें दखल क्यों देना पड़ रहा है।

सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने भी कहा कि चुनाव के बाद भी जनता के फैसले का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हॉर्स ट्रेडिंग होती है, बड़े पैमाने पर दल-बदल होता है और विधायकों को रिसॉर्ट्स में रखा जाता है, तो चुनाव की शुचिता पर सवाल खड़े होते हैं। जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय विधायकों को शपथ लेने का मौका तक नहीं मिला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में ऐसी घटनाएं जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं।

वोट चोरी के आरोप से बाज आए विपक्ष, नहीं तो झेलना पड़ेगा नुकसान- देवगौड़ा
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि अगर विपक्षी दल इसी तरह वोट चोरी का मुद्दा उठाते रहे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाकर मतदाताओं के मन में संदेह पैदा करते रहे तो उन्हें नुकसान झेलना पड़ेगा। सदन में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार को घेरा और एसआईआर में विसंगतियों को लेकर चुनाव आयोग (ईसी) पर भी सवाल उठाए।

देवगौड़ा ने सड़कों और सार्वजनिक मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर भी विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा, हम भी चुनाव हारे, लेकिन हमने कभी किसी पीएम या सार्वजनिक संस्था का मजाक नहीं उड़ाया...भारत बहुत बड़ा देश है। याद रखिए वोट चोरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके आप आने वाले दिनों में नुकसान उठाने वाले हैं।

कांग्रेस सांसद दिग्वजिय सिंह ने कहा कि आयोग साल में चार बार संक्षिप्त पुनरीक्षण करता है तो फिर एसआईआर की क्या जरूरत है। आरएसएस को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वह पंजीकृत है। कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एसआईआर को चुनिंदा वैचारिक ढंग से मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और वोट देने के अधिकार पर चौतरफा हमला है।


पहले भी हो चुका है एसआईआर- मेघवाल
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि एसआईआर सांविधानिक रूप से वैध है और अतीत में भी कई बार किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चुनावी सूची को संशोधित करने की पहल बीआर अंबेडकर की तरफ से बनाए गए सांविधानिक ढांचे पर आधारित है। उन्होंने कहा, हमें इसके साथ आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि यह चुनाव सुधारों का भी एक प्रमुख स्तंभ है।

पर्यावरण मंजूरी के लिए मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी

सरकार ने कहा है कि वह राष्ट्रीय पर्यावरण नियामक बनाने पर विचार नहीं कर रही है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2011 के लाफार्ज फैसले में सिफारिश की थी, और इसके बजाय पर्यावरण मंज़ूरी देने के लिए मौजूदा संस्थागत व्यवस्था को जारी रखने का फैसला किया है। लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में, पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि पर्यावरण मंज़ूरी के लिए प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन करने की मौजूदा प्रणाली को जारी रखा जा सकता है। मंत्रालय ने कहा कि पारदर्शिता और दक्षता में सुधार के लिए इस ढांचे के तहत कई कदम उठाए गए हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार नेशनल एनवायरनमेंटल रेगुलेटर (NER) स्थापित करने की योजना बना रही है और यदि हां, तो इसकी प्रस्तावित संरचना और शक्तियां क्या होंगी, पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने नकारात्मक जवाब दिया।
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परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी का बिल पेश

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी की अनुमति देने संबंधी विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश किया गया। नए विधेयक का उद्देश्य भारत के नागरिक परमाणु क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले कानूनों में व्यापक संशोधन करना है, जिससे निजी भागीदारी को बढ़ावा मिले और उद्योग भागीदारों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक नई जवाबदेही व्यवस्था लागू हो सके।

परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को भारत के रुपांतरण के लिए सतत परमाणु ऊर्जा दोहन एवं विकास विधेयक, 2025 पेश किया। इस पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए शोरगुल शुरू कर दिया। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड को वैधानिक दर्जा : विधेयक को भारत की पूर्ण परमाणु ऊर्जा क्षमता का दोहन करने के लिए व्यापक कानून के रूप में देखा जा रहा है। यह परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को निरस्त करने का प्रयास करता है। पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, विधेयक का उद्देश्य परमाणु क्षति के लिए एक व्यावहारिक नागरिक दायित्व व्यवस्था प्रदान करना और परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड को वैधानिक दर्जा प्रदान करना है।
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