प्रमोशन में आरक्षण पर संसद में मंगलवार को भी सियासी संग्राम हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने प्रमोशन में आरक्षण को लेकर राज्यसभा में नियम 267 के तहत स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। इसके बाद सीपीएम के सांसद केके रागेश ने भी प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया। वहीं मंगलवार को राज्यसभा में कोई विधेयक पेश नहीं किया गया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में मंगलवार को अर्थव्यवस्था के संकट में होने के विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए स्पष्ट कदमों के कारण अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है और आर्थिक क्षेत्र में शुरुआती उछाल दिखाई दे रहा है ।
लोकसभा में 2020-2021 के केंद्रीय बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि मुद्रास्फीति औसतन 4.8 प्रतिशत रही है, फैक्टरी उत्पादन बढ़ा है, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है, जीएसटी राजस्व संग्रह बढ़ा है, और यह पिछली तिमाही में हर महीने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक ही रहा है। आर्थिक क्षेत्र के हर मानदंडों पर अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था संकट में नहीं है। सरकार द्वारा उठाए गए स्पष्ट कदमों के कारण अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है और आर्थिक क्षेत्र में शुरुआती उछाल दिखाई दे रहा है। लेकिन विपक्ष इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
बजट चर्चा का जवाब दे रहीं वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय आधारभूत पाइपलाइन परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार आधारभूत ढांचे के विकास के लिये 2024-25 तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि निवेश करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक एवं निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिये पर्याप्त कदम उठाए हैं, साथ ही उपभोग बढ़ाने की दिशा में भी पहल की है।
उन्होंने कहा कि कारोबारियों और एमएसएमई क्षेत्र सहित सभी पक्षकारों से चर्चा चल रही है और सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि हर सेक्टर पर पर्याप्त ध्यान दिया जा सके। सीतारमण ने कहा कि उपभोग बढ़ाने के लिए 2019-20 में सभी निर्धारित रबी और खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है।
अर्थव्यवस्था के बहुत ही खराब स्थिति में होने का दावा करते हुए विपक्षी दलों ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि इसमें सुधार के लिए सरकार की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं क्योंकि बजट पूरी तरह दिशाहीन है। हालांकि इससे इंकार करते हुए सत्ता पक्ष ने कहा कि यह बजट वर्तमान समय की चुनौतियों को देख कर तैयार किया गया है जिसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे।
बजट 2020-21 पर उच्च सदन में सोमवार से चल रही सामान्य चर्चा को आगे बढ़ाते हुए भाकपा के विनय विश्वम ने बजट को असफल और वादे पूरे करने में अक्षम बताते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था सीधे-सीधे वेंटीलेटर पर है, बाहर कैसे आएगी ? सरकार के पास एकमात्र संजीवनी निजीकरण है।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार हर चीज का निजीकरण करना चाहती है । वह देश की संपदा निजी कारोबारियों के हाथ बेचना चाहती है। सरकार के पास एक विकल्प एफडीआई यानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी है। विश्वम ने कहा कि खुद आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने निजीकरण का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि बीएमएस ने कहा है कि मध्यम वर्ग को राहत देने वाले एलआईसी का निजी हाथों में जाना ठीक नहीं होगा। इसके बावजूद सरकार राष्ट्रीय संपदा की बिक्री पर आमादा है जिसके अच्छे नतीजे नहीं होंगे।
भाकपा नेता ने कहा कि मध्यम वर्ग के लिए कोई राहत की बात बजट में नहीं है, न ही गरीब वर्ग को ध्यान में रखा गया है। बेरोजगारी, महंगाई, आय में कमी, मुद्रास्फीति जैसी समस्याओं का हल कैसे निकलेगा, इसकी कोई रूपरेखा बजट में नहीं है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को बचाना होगा और इसके लिए अलग आर्थिक नीति बनानी होगी।
टीआरएस सदस्य के केशवराव ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि बजट में जरूरी मुद्दों का कोई समाधान ही नहीं है। जीडीपी की वृद्धि दर 4.5 फीसदी है और केवल इस पर ही निर्भर करना ठीक नहीं होगा।
अन्नाद्रमुक सदस्य मुत्तुकरप्पन ने किसानों के लिए 20 लाख सौर पम्प लगाने के कदम को सराहनीय बताया। साथ ही उन्होंने तमिलनाडु में मछुआरों के लिए सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की।उन्होंने केंद्रीय योजनाओं के लिए तमिलनाडु के हिस्से के 7000 करोड़ रुपये भी शीघ्र जारी किए जाने की मांग की।
बसपा के वीर सिंह ने बजट को जनविरोधी बताते हुए कहा कि सरकार कहती है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर दी जाएगी। लेकिन आपने तो उन्हें उनकी उपज की लागत का डेढ़ गुना अधिक दाम देने का वादा भी पूरा नहीं किया। उनकी आत्महत्या के मामले थम नहीं रहे। इस पर सरकार ने बजट में चुप्पी साध रखी है। वीर सिंह ने सरकार पर पूंजीपतियों की हितैषी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। वहीं दूसरी ओर पूंजीपतियों को एक लाख 45 हजार करोड़ रुपये की राहत दी गई।