उन्होंने विभिन्न दलों के सदस्यों द्वारा एमसीआई में बदलाव को लेकर सरकार की मंशा पर उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए कहा कि साल 2014 से एमसीआई की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए गए हैं। हर्षवर्धन ने कहा कि यह एक अस्थाई व्यवस्था है और सरकार जल्द स्थाई समाधान के तौर पर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) विधेयक लेकर आएगी।
हर्षवर्धन ने कहा कि एमसीआई के बोर्ड में प्रतिष्ठित डॉक्टरों को शामिल किया गया है। बोर्ड ने पिछले आठ महीने में देश के सभी इलाकों में संचालित मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस की 15 हजार सीटें बढ़ा दीं जो अपने आप में रिकॉर्ड है। बोर्ड ने ज्यादा मेडिकल कॉलेजों की अनुमति दी और नियामक समय सीमाओं को भी पूरा किया।
उन्होंने कहा, ‘एनएमसी विधेयक जल्द संसद में आएगा और स्थाई व्यवस्था बनेगी।’ उन्होंने सदस्यों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि सरकार का एमसीआई की स्वायत्तता को खत्म करने का कोई इरादा नहीं है। वह बोर्ड के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करती और केवल कामकाज पर निगरानी रखती है।