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छोटे बच्चों के माता-पिता और गर्भवती महिलाएं घर पर ही होंगे क्वारंटीन

Mon, 25 May 2020 04:52 AM IST
श्रीधर मिश्रा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : PTI
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केंद्र सरकार ने विदेश में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए जारी गाइडलाइंस में गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने साफ किया है कि गर्भवती महिलाओं और 10 साल से छोटे बच्चों के माता-पिता को स्वदेश वापसी के बाद 14 दिन का क्वारंटीन पीरियड सरकारी सेंटरों या चिह्नित होटलों में नहीं काटना होगा। इन सभी को उनके घर पर ही क्वारंटीन किया जाएगा, लेकिन उन सभी के लिए मोबाइल में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना अनिवार्य किया जाएगा।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में यह भी साफ किया है कि विपत्ति में फंसे लोगों, परिवार में किसी के मृत होने पर लौटने वालों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को भी घर पर ही क्वारंटीन किया जाएगा। हालांकि यह सुविधा उन्हीं लोगों को मिलेगी, जिनकी समस्या का सत्यापन उनका गृह राज्य करेगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को क्वारंटीन किए जाने के लिए अपने नियम तय करने की भी छूट दी गई है।

गृह मंत्रालय ने यह भी कहा है कि विदेश से लौटने वाले हर यात्री को अनिवार्य रूप से 14 दिन के लिए क्वारंटीन रहना होगा। हालांकि इसमें थोड़ी छूट देते हुए सरकार ने तय किया है कि ऐसे लोग 7 दिन के लिए सरकारी क्वारंटीन सेंटर या चिह्नित होटल में रखे जाएंगे और शेष 7 दिन ये अपने घर पर क्वारंटीन रहकर बिताएंगे। होटल में क्वारंटीन किए जाने की अवधि का खर्च सरकार इन्हीं लोगों से वसूल करेगी।
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बता दें कि वंदे भारत मिशन के तहत विदेश में फंसे भारतीयों को लाने के समय सरकार की तरफ से 5 मई को घोषित एसओपी में क्वारंटीन पीरियड 28 दिन का रखा गया था, जिसमें 14 दिन सरकारी सेंटर और 14 दिन अपने घर पर काटना था। उस समय सभी लोगों के लिए आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना भी अनिवार्य बनाया गया था। सरकार ने इस समय 40 देशों में वंदे भारत मिशन के तहत अपने नागरिकों को वापस लाने का अभियान चलाया हुआ है। इसी का तीसरा चरण अब चालू किया जाना है।

दूतावासों में पंजीकरण कराने वाले ही लौटेंगे

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला के मुताबिक, विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों को वापसी के लिए संबंधित देश में मौजूद भारतीय दूतावास में अपना पंजीकरण कराना होगा। दूतावासों से ये डाटा विदेश मंत्रालय को मिलेगा। इस पंजीकरण डाटा के आधार पर ही विदेश मंत्रालय विमान और पोत भेजने की तैयारी करेगा। यह डाटाबेस विदेश मंत्रालय हर यात्री के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के साथ भी शेयर करेगा ताकि, उन्हें क्वारंटीन करने की व्यवस्था की जा सके। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय कम से कम दो दिन पहले हर यात्री का यात्रा कार्यक्रम अपने ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफार्म पर डिस्प्ले करेगा। इसमें यात्री का ब्योरा और उसके विमान या पोत का दिन, जगह और समय दिया जाएगा।

भारत में फंसे विदेशी नागरिकों के लिए भी सुविधा

गृह मंत्रालय की एसओपी के हिसाब से भारत में फंसा कोई भी विदेशी नागरिक अपने देश लौटने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पास आवेदन कर सकता है। ऐसे व्यक्ति को उसके देश में जा रही वंदे भारत मिशन की फ्लाइट से भेजने की व्यवस्था की जाएगी। उसके टिकट को कंफर्म करने से पहले नागरिक उड्डयन मंत्रालय संबंधित देश से भी उस व्यक्ति को लाने की इजाजत मांगेगी। इस यात्रा का पूरा खर्च उस व्यक्ति से ही वसूला जाएगा।
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