जबलपुर आयुध फैक्टरी से करीब 45 एमपीवी खरीदने का ऑर्डर दिया गया। ये एमपीवी अर्धसैनिक बलों को मिलने वाले ही थे कि ऐन मौके पर एक नया पेंच फंस गया। ये सभी एमपीवी यूरो-2 के तहत बने हुए थे, जबकि अब यूरो-4 से नीचे के मानकों वाली गाड़ी का पंजीकरण ही नहीं किया जाता। यहां पर मामला फिर से अटक गया। भारत में केवल आर्मी को ही वो भी कुछ मामलों में यूरो के मानकों से छूट प्राप्त है।
वह भी इस तरह कि आर्मी अपने वाहनों को किसी राज्य की परिवहन अथॉरिटी में नहीं, बल्कि खुद ही इनका रजिस्ट्रेशन करती है। इसका तोड़ निकालने के लिए दो रास्ते सुझाए गए। पहला, सेना की तर्ज पर अर्धसैनिक बलों को भी खुद रजिस्ट्रेशन की पावर दे दी जाए। दूसरा, यह कि इन वाहनों का पहले आर्मी के पास रजिस्ट्रेशन करा दिया जाए और उसके बाद इन्हें दूसरे बलों को सौंप दिया जाए। इसके लिए सीआरपीएफ ने सभी बलों की ओर से मजबूत पक्ष रखा।
....और जीत सीआरपीएफ को मिली
गृह मंत्रालय ने काफी सोच विचार कर इस बाबत कदम आगे रखा। कई महीने तक सभी कानूनी बारीकियों को समझा गया। इसके बाद तय किया गया कि पहले डेढ़ साल तक एमपीवी के रजिस्ट्रेशन की पावर सीआरपीएफ को दे दी जाए। मतलब एमपीवी जिस भी बल को मुहैया कराया जाएगा, वही उसका रजिस्ट्रेशन भी करेगा।
इसमें अन्य कोई संस्था हस्तक्षेप न कर सके, इसके लिए केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना भी जारी कर दी। अब यदि सभी एमपीवी एक साथ नहीं मिल सके तो डेढ़ साल के बाद इस अधिसूचना का समय आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ करीब दो सौ बुलेटप्रूफ गाडियां, जिप्सी जैसी अर्धसैनिक बलों को मुहैया कराई जा रही हैं। इनमें से 110 वाहन अकेले सीआरपीएफ को मिलेंगे, बाकी दूसरे बलों को अलॉट होंगी।
नक्सली खतरे से निपटने के लिए 2106 करोड़ रुपये खर्च
साल रुपये
2015-16 - 356.41 करोड़
2016-17 - 273.98 करोड़
2017-18 - 743.93 करोड़
2018-19 - 732.01 करोड़
नक्सली वारदातें
| राज्य |
2015 |
2016 |
2017 |
2018 (30 जून तक) |
| आंध्रप्रदेश |
35 |
17 |
26 |
04 |
| बिहार |
110 |
129 |
99 |
33 |
| छत्तीसगढ़ |
466 |
395 |
373 |
222 |
| झारखंड |
310 |
323 |
251 |
109 |
| महाराष्ट्र |
55 |
73 |
69 |
44 |
| ओडिसा |
92 |
86 |
81 |
53 |
इतने सुरक्षाकर्मी मारे गए
2015- 59
2016- 65
2017- 75
2018- 47 (30 जून तक)
आर्थिक लक्ष्यों पर हमले
2015 - 127
2016 - 79
2017 - 75
2018 - 48
एमपीवी की पावर बढ़ाई जाएगी
मौजूदा एमपीवी की क्षमता बेहद कम है। वाहन का निचला हिस्सा महज 10 किलोग्राम तक का टीएनटी विस्फोट झेल सकता है। टायर के नीचे 14 किलोग्राम का विस्फोट होता है तो भी जवान सुरक्षित रहते हैं। अब नए एमपीवी की क्षमता 20-30 किलोग्राम का विस्फोट सहने तक बढ़ाई जाएगी। वजह, नक्सली कई बार अधिक वजन का विस्फोटक जमीन में दबा देते हैं।