रणबीर सिंह के मुताबिक, इससे पहले आईटीबीपी, सीआरपीएफ, एसएसबी द्वारा इस संबंध में एसओपी जारी कर दी गई है। सबसे पहले बीएसएफ के तत्कालीन डीजी राकेश अस्थाना ने 15 मार्च 2021 को अपने रिटायर्ड सैनिकों को मरणोपरांत आखिरी सलामी सम्मान देने के लिए एसओपी जारी की थी।
आठ हजार रुपये तक की सहायता राशि देने का भी प्रावधान
इसके बाद 2 नवंबर 2021 को डीजी सीआरपीएफ ने ये आदेश जारी किए थे। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में रिटायर्ड कर्मियों को उनके निधन पर सम्मान देने की बात कही गई थी। डीजी की तरफ से अंतिम विदाई के वक्त उन्हें सलामी दी जाती है। जरूरतमंद परिवार को आठ हजार रुपये तक की सहायता राशि देने का भी प्रावधान किया गया है। बल के अधिकारी अपने डीजी की तरफ से दिवंगत कर्मी की अंतिम यात्रा में शामिल होते हैं। अंतिम संस्कार से पहले बल अधिकारी द्वारा सलामी देने का प्रावधान है।
डीजी की तरफ से बतौर सम्मान भेजी गईं फूल मालाएं दिवंगत कर्मी की पार्थिव देह पर रखने की बात कही गई। अंतिम संस्कार के बाद दिवंगत कर्मी के परिवार को आठ हजार रुपये तक की आर्थिक मदद देने का भी प्रावधान है, बशर्ते वह जरूरतमंद परिवार हो। तत्कालीन डीजी कुलदीप सिंह ने अपने आदेश में कहा था, सीआरपीएफ अपने कर्मियों को सदैव याद रखती है। उनके दुख-तकलीफों में यह बल सदा उनके साथ खड़ा है। यह बल, न केवल सेवा के दौरान, बल्कि अंतिम वक्त में भी अपने पूर्व कर्मियों के साथ रहता है। इन्होंने निस्वार्थ भाव से देश की सेवा की है। जिन्होंने अपना बलिदान दिया है, उन जवानों या अफसरों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
ये होगा प्रोटोकॉल
सीआरपीएफ में रिटायर्ड कर्मी के निधन पर उसके परिजनों को निकटवर्ती बल यूनिट या मुख्यालय को सूचित करना होगा। दिवंगत कर्मी अगर आईजी या उससे बड़े रैंक से रिटायर हुआ है, तो उसकी अंतिम यात्रा में कमांडेंट स्तर का अधिकारी पहुंचकर सलामी देगा। डीआईजी और उससे नीचे के कर्मियों की अंतिम यात्रा में सेकंड इन कमांड या डिप्टी कमांडेंट शामिल होंगे। एसओ व ओआर के लिए सहायक कमांडेंट और इंस्पेक्टर की ड्यूटी लगाई गई है। अंतिम संस्कार का फोटो भी लिया जाएगा, ताकि बाद में उसे ऑडिट प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सके।
यह सम्मान केवल उन रिटायर्ड कर्मियों को मिलेगा, जिनके पास रिटायर्ड कर्मी वाला पहचान पत्र या पेंशनर आईकार्ड होगा। बल द्वारा सभी रिटायर्ड कर्मियों का डाटा अपडेट किया गया है। डीजी ने अपने पत्र में कहा था, चूंकि यह बल कश्मीर, नक्सल और उत्तर पूर्व के उग्रवाद प्रभावित इलाकों में तैनात है, ऐसे में अगर वहां पर बल को अंतिम सलामी के लिए जाना पड़े, तो उसके लिए स्थानीय प्रशासन व पुलिस का सहयोग लिया जाए।