मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को सुप्रीम कोर्ट ने जारी रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि परमबीर सिंह को फिलहाल गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को निर्देश दिए किस वह परमबीर सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों में अपनी जांच जारी रख सकती है, लेकिन संबंधित मामलों में कोर्ट में चालान दायर नहीं किया जा सकेगा।
इसके अलावा कोर्ट ने सीबीआई को परमबीर सिंह की याचिका पर अपना हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया। कोर्ट इस मामले में 11 जनवरी को अगली सुनवाई करेगा। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि महाराष्ट्र पुलिस द्वारा परमबीर सिंह के खिलाफ की जांच को अपने हाथों में लेने में कोई समस्या नहीं है।
जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, अदालत का विचार है कि सिंह के खिलाफ जांच किसी अन्य जांच एजेंसी को सौंपी जा सकती है। जैसे ही महाराष्ट्र राज्य के वकील ने सिंह की याचिका का विरोध किया तो पीठ ने कहा, वह राज्य पुलिस द्वारा दर्ज मामलों में सिंह के खिलाफ पूर्वाग्रह की संभावना के बिंदु से इस मुद्दे पर विचार कर रही है।
महाराष्ट्र सरकार कर चुकी है निलंबित
परमबीर सिंह पर महाराष्ट्र सरकार ने कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। दरअसल, परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ कई आरोप लगाए थे। इसके बाद से अनिल देशमुख के खिलाफ ईडी व सीबीआई की जांच चल रही है।
परमबीर सिंह को नहीं माना जा सकता व्हिसलब्लोअर
महाराष्ट्र सरकार ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह को कानूनन एक व्हिसलब्लोअर नहीं माना जा सकता है। सरकार ने सिंह की याचिका को खारिज करने की मांग उठाते हुए कहा था कि ऐसा इसलिए क्योंकि सिंह ने पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के कथित भ्रष्टाचार के बारे में अपने ट्रांसफर के बाद जानकारी दी।
न्यायाधीश एसके कौल की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 22 नवंबर को महाराष्ट्र पुलिस को परमबीर सिंह को उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में गिरफ्तार न करने का निर्देश देते हुए बड़ी राहत दी थी। पीठ ने हैरानी जताई थी कि क्या पुलिस अधिकारियों और वसूली करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए उनका पीछा किया जा रहा है।
पीठ ने सीबीआई से एक हफ्ते में हलफनामा मांगा
सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, उन्हें सिंह की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जाए। हालांकि मेहता ने भी कहा कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जा सकती है। जिसके बाद पीठ ने सीबीआई को एक हफ्ते में हलफनामे के जरिए पक्ष रखने के लिए कहा।
याचिका खारिज करने की मांग
महाराष्ट्र सरकार के वकील ने पीठ से कहा कि सिंह की याचिका को खारिज किया जाना चाहिए। इससे पहले सिंह के वकील ने कहा, यह जानते हुए कि सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई कर रहा है, पुलिस ने एक मामले में दो दिन पहले आरोपपत्र दाखिल किया है।