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कांग्रेस में सर्जरी और सुधार के नाम पर मची खलबली

Fri, 20 May 2016 08:03 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ अमर उजाला,नई दिल्ली

सार

  • प्रियंका को कमान देने की दबे सुर में मांग पर राहुल को सौंपी जा सकती है बागडोर
  • समुद्र मंथन का जहर निगलकर नीलकंठ बनना चाहते हैं दिग्विजय
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विस्तार
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असम और केरल में करारी हार के बाद कांग्रेस में नया रार पैदा हो गया है। कुनबे में खलबली है। पार्टी की सर्जरी कर सड़े अंगों को काटने की वकालत हो रही है और युवा हाथों में कमान सौंपने की मांग की जोर पकड़ा है। लेकिन दिलचस्प यह है कि कोई सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व पर उंगली उठाने का साहस करने की स्थिति में नहीं है। पार्टी अंदरुनी खींचतान से गुजर रही है जिसमें एक धड़ा प्रियंका गांधी को कमान सौंपने का पक्षधर है लेकिन इस मांग को भी दमदार तरीके से रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। दूसरी ओर तमाम विफलताओं को दरकनार कर दूसरा धड़ा राहुल गांधी को तुरंत बागडोर सौंपने के लिए लांबिंग में जुट गया है।
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कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने पार्टी में सर्जरी की बात कर हलचल मचाई लेकिन तुंरत बाद सफाई भी पेश कर दी। उन्होंने कहा है कि उनका तात्पर्य नेतृत्व की सर्जरी से नहीं है। दिग्विजय ने कहा है सोनिया गांधी सर्जन है और उन्हें ही सर्जरी करनी है। उन्होंने हार के लिए नेतृत्व को ही नहीं बल्कि सबको समान रूप से जिम्मेदार माना है। उन्होंने कहा कि राज्यों के प्रभारी और राज्य नेतृत्व अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। एंटनी कमेटी ने आलाकमान को रिपोर्ट पहले ही सौंप दी है। फरवरी में ही आलाकमान को बीमारी के लक्षण और कारण बता दिए गए हैं। अब आलाकमान को फैसला करना है। हम यही बता रहे हैं कि अब इलाज का वक्त आ गया है।

उन्होंने कहा कि हर स्तर पर जरूरी बदलाव करना होगा। प्रियंका गांधी राजनीति में आती हैं तो खुशी होगी। उनमें आकर्षण हैं और उनमें लोगों को प्रभावित करने की क्षमता भी है। लेकिन प्रियंका राजनीति में आने के बारे में खुज फैसला करेंगी और यह उनके परिवार का ही निर्णय होगा। अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए दिग्विजय ने कहा कि उनकी आस्था सोनिया, राहुल और गांधी परिवार में है। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र मंथन में निकला जहर अगर उनके हिस्से में आता है तो वे उसे पीने को तैयार हैं। वे 10- 11 साल से महासचिव हैं और पार्टी चाहे तो वे इस जिम्मेदारी से मुक्त होने को प्रस्तुत हैं। उधर शशि थरूर ने युवा हाथों में कमान सौंपने की मांग की है। थरुर ने कहा कि पार्टी को नया जोश और नया खून चाहिए। अब पार्टी को एक्शन मोड में लाने की जरुरत है। थरुर नई सोच और युवा चेहरे की वकालत कर रहे हैं। 
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दिग्विजय और थरूर दोनों नेताओं ने अपरोक्ष रूप से पांच राज्यों के चुनाव में पार्टी के निर्णयों पर भी सवाल उठाए हैं। दिग्विजय ने कहा कि तमिलनाडु और पशिचम बंगाल में गठबंधन का फैसला और पहले हो गया होता तो कार्यकर्ताओं को सामंजस्य बिठाने में ज्यादा आसानी होती। इन विवादों के बीच आलाकमान ने खामोशी ओढ़ ली है। वैसे सूत्रों की मानें तो राहुल को अब जल्द पार्टी का अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
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