संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही लाइव दिखाने वाले लोकसभा और राज्यसभा टीवी का अब विलय हो सकता है। एक कमेटी ने सरकार को सुझाव दिया है कि अलग-अलग दो चैनलों के बजाए एक ही संसद टीवी चैनल होना चाहिए।
कमेटी का गठन दो चैनलों की व्यावहारिकता पर विचार करने के लिए किया गया था। इसमें कुछ सांसद भी शामिल थे। कमेटी के द्वारा दिए गए सुझाव पर तीन सब कमेटियां तमाम पहलुओं पर गौर कर रही हैं। सब कमेटी के सामने टेक्नीकिल, मानव संसाधन और लोकेशन को व्यवस्थित करने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
दोनों चैनलों का विलय करने संबंधी सुझाव के अलावा कमेटी की ये भी राय है कि लोकसभा और राज्यसभा टीवी को दोनों सदनों की कार्यवाही का लाइव प्रसारण जारी रखनी चाहिए। यह उस स्थिति में हो जब दोनों सदनों की कार्यवाही चल रही हो। जब संसद नहीं चले, उस समय केवल एक ही चैनल का प्रसारण हो। जिससे बड़े पैमाने पर संयुक्त रूप से दर्शकों के लिए कंटेट का प्रसारण होता रहे।
विलय के बाद आनेवाला नया चैनल संसद, राज्य विधानसभाओं और दूसरे संवैधानिक संस्थाओं की कार्यशैली से संबंधित कंटेट का प्रसारण करने पर ध्यान केंद्रीत करे। कमेटी ने मजबूत संपादकीय नीति की भी वकालत की है। गौरतलब है कि पिछले साल राज्यसभा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी को लागत और संसदीय कार्यवाहियों पर अतिरिक्त खर्च की कटौती के बारे में राय देनी थी।