कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन की महाराष्ट्र विकास आघाडी सरकार भीड़ हिंसा की इस घटना में संलिप्त लोगों को अदालत के कठघरे में ले जाएगी। उन्होंने कहा, ‘लेकिन यह आश्चर्यजनक है कि भाजपा ने साधुओं की हत्या के आरोपी अपने लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।’ सावंत ने मांग की कि केंद्र भीड़ हिंसा के खिलाफ एक कानून लाए जैसा कि उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि शीर्ष न्यायालय के निर्देश के बावजूद केंद्र सरकार पिछले दो साल में भीड़ हिंसा के खिलाफ कानून नहीं लाई। इसके अलावा इस सिलसिले में 11 दिशा-निर्देश भी जारी किए गए लेकिन केंद्र सरकार ने इनपर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद जुलाई 2019 में भी शीर्ष न्यायालय ने भीड़ हिंसा के मामलों पर संज्ञान लिया और केंद्र को एक नोटिस भेजकर पूछा कि पूर्व के निर्देशों पर क्या कदम उठाए गए हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी नीत केंद्र सरकार ने कुछ नहीं कहा।
उन्होंने कहा, ‘पालघर घटना के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को फोन किया लेकिन भीड़ हिंसा की घटनाओं के खिलाफ कानून लाने के लिए कुछ नहीं किया।’ भीड़ हिंसा की घटनाएं अन्य राज्यों में भी हुईं लेकिन भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता ने कोई चिंता प्रकट नहीं की। इसके बजाय कुछ मामलों में आरोपियों का अभिनंदन किया गया।
संपर्क किये जाने पर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कांग्रेस के आरोप को खारिज करते हुए कहा, कांग्रेस द्वारा उल्लेख किए गए दोनों लोग भाजपा कार्यकर्ता नहीं हैं। तस्वीरें (कांग्रेस द्वारा जारी) सार्वजनिक कार्यक्रम की हैं जिनमें कई ग्रामीण शामिल हुए थे।