Palestinian Foreign Minister: गाजा को मेडिटरेनियन रिवेरा बनाने के ट्रंप के विचार पर फलस्तीन ने सशर्त समर्थन जताया है। फलस्तीनी विदेश मंत्री वर्सेन शाहीन ने कहा कि योजना तभी स्वीकार्य होगी जब उसका लाभ गाजा के फलस्तीनियों को मिले। उन्होंने भारत की संभावित भूमिका को सकारात्मक बताया। आइए जानते हैं ट्रंप से लेकर भारत की भागीदारी तक उन्होंने क्या कुछ कहा।
गाजा को लेकर वैश्विक चर्चा के बीच फलस्तीन ने अमेरिका के राष्ट्रपति के 'मेडिटरेनियन रिवेरा' वाले विचार पर सशर्त सहमति जताई है। मेडिटरेनियन रिवेरा यानी भूमध्यसागरीय रिवेरा का मतलब भूमध्य सागर के तट पर स्थित खूबसूरत तटीय क्षेत्र। फलस्तीनी विदेश राज्य मंत्री वर्सेन अघाबेकियन शाहीन ने स्पष्ट कहा कि यदि गाजा का पुनर्निर्माण 'रिवेरा' के रूप में होता है तो उसका लाभ केवल गाजा के फलस्तीनियों को मिलना चाहिए। किसी और के हित में, फलस्तीनियों को दरकिनार कर बनाई गई योजना स्वीकार्य नहीं होगी।
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एक साक्षात्कार में शाहीन ने कहा कि शांति की हर पहल स्वागतयोग्य है, लेकिन उसे फलस्तीनियों के राजनीतिक अधिकारों और स्वतंत्रता के स्पष्ट रास्ते से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के रुख की सराहना की और कहा कि किसी भी शांति योजना का अंत परिणाम साफ होना जरूरी है।
भारत की भूमिका क्या हो सकती है?
शाहीन ने कहा कि प्रस्तावित पीस बोर्ड में भारत की भागीदारी फलस्तीन के लिए सहायक हो सकती है। भारत के इस्राइल और फलस्तीन दोनों से संतुलित रिश्ते हैं, जो संवाद को आगे बढ़ाने में मददगार बन सकते हैं। हालांकि, उन्होंने जोड़ा कि बोर्ड की दिशा और लक्ष्य स्पष्ट हों, तभी सहभागिता सार्थक होगी।
गाजा की जमीनी हकीकत क्या कहती है?
आंशिक संघर्षविराम के बावजूद गाजा में हालात अब भी नाज़ुक हैं।
स्थायी और टिकाऊ युद्धविराम के बिना पुनर्निर्माण संभव नहीं।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन के बिना गाज़ा को दोबारा खड़ा करना कठिन होगा।
क्षेत्रीय अस्थिरता, विशेषकर ईरान-अमेरिका तनाव, शांति प्रयासों को कमजोर कर सकती है।
इस्राइल, हमास और आगे का रास्ता
शाहीन ने कहा कि शांति ढांचे के तहत हमास का निरस्त्रीकरण होना चाहिए, बशर्ते समूह उस ढांचे को स्वीकार करे। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी तट पर अवैध बसावट और हिंसा जारी है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। फलस्तीनियों का हक है कि उन्हें उनका स्वतंत्र राज्य मिले अब वक्त है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे साकार करने में मदद करे।