पलानीस्वामी ने राज्य में सत्तारूढ़ डीएमके पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि डीएमके चार साल से सत्ता में है, लेकिन उन्होंने कोई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू नहीं की है। उन्होंने डीएमके के शासन को जनविरोधी करार देते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
तमिलनाडु में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एआईएडीएमके के महासचिव पलानीस्वामी ने आगामी चुनावों को उनकी पार्टी और सत्तारूढ़ DMK के बीच सीधा मुकाबला बताया है। उनका यह बयान अभिनेता से नेता बने विजय के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगले साल चुनावी मुकाबला उनकी टीवीके पार्टी और सत्तारूढ़ डीएमके के बीच होगा।
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विजय के बयान को लेकर उन पर तंज कसते हुए पलानीस्वामी ने कहा कि सभी पार्टियों के नेताओं की अपनी आकांक्षाएं होती हैं और यह उनकी निजी इच्छा है, लेकिन यह पहले से ही साफ है कि मुख्य मुकाबला किन-किन पार्टियों के बीच है। उन्होंने ये दावा समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार के दौरान किया।
पलानीस्वामी ने कहा कि राज्य के लोग समझदार हैं, उन्हें पता है कि सत्ता हासिल करने की लड़ाई केवल इन दो बड़ी पार्टियों के बीच है। पलानीस्वामी ने कहा कि डीएमके सरकार जनता के बीच अपना प्रभाव खो चुकी है। 2026 के विधानसभा चुनाव में, अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन 210 सीटें जीतेगा और अन्नाद्रमुक अपने बहुमत के आधार पर सरकार बनाएगी।
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इस दौरान उन्होंने अपनी पार्टी के पिछले कार्यकाल का भी जिक्र किया। पलानीस्वामी ने कहा कि एआईएडीएमके ने तमिलनाडु में लगभग 31 वर्षों तक शासन किया है। उन्होंने दावा किया कि उसके शासनकाल में लोगों को लाभान्वित करने वाली कई योजनाएं चलाईं गई। जिनके परिणामस्वरूप तमिलनाडु देश में सर्वश्रेष्ठ राज्य बना।
इस दौरान पलानीस्वामी ने राज्य में सत्तारूढ़ डीएमके पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि डीएमके चार साल से सत्ता में है, लेकिन उन्होंने कोई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू नहीं की है। उन्होंने डीएमके के शासन को जनविरोधी करार देते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। विपक्ष के नेता पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य नें कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई है। उन्होंने कहा कि स्टालिन की सरकार में राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई है।