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पाकिस्तानी मंत्री ने महिला सांसद को प्राइवेट चैंबर में बुलाया, सोशल मीडिया पर बवाल

Wed, 25 Jan 2017 03:07 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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पाकिस्तान की महिला सांसद नुसरत सहर अब्बासी - फोटो : Facebook
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पाकिस्तानी संसद में अपने पुरुष साथियों के हाथों उत्पीड़न का शिकार होने के बाद एक महिला सांसद ने आत्मदाह की धमकी दे डाली। पूरे प्रकरण से आहत महिला सांसद ने कहा कि यह पूरा प्रकरण दिखाता है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बने कानून लागू क्यों नहीं हो पाएं हैं। 
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पाकिस्तान के सिंध इलाके से सांसद नुसरत सहर अब्बासी का आक्रोश तब फूट पड़ा जब प्रांत के मंत्री इमदाद पिताफी ने शुक्रवार को अब्बासी को अपने प्राइवेट चैंबर में बुलाने की बात कही। पिताफी का ये कमेंट रुढ़िवादी पाकिस्तान में यौन उत्पीड़न के रूप में देखा जा रहा है। 

इस टिप्पणी से अब्बासी बहुत नाराज हुई और उन्होंने इसे शारीरिक प्रताड़ना कहते हुए संसद के बाहर धरना दिया। उन्होंने कहा कि डिप्टी स्पीकर एक महिला हैं और इसके बावजूद भी पिताफी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। 
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अब्बासी ने दी खुद को जलाने की धमकी

नुसरत सहर अब्बासी को चादर ओढ़ाते पाक मंत्री - फोटो : Facebook
शनिवार को अब्बासी को पेट्रोल से भरी बोतल हाथ में लिए देखा गया और उन्होंने कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो वह खुद को जला लेंगी। 

सोशल मीडिया पर इस मामले के जोर पकड़ने के बाद दबाव में आए पिताफी ने संसद में अब्बासी से माफी मांगी और साथ ही उनके प्रति सम्मान जताते हुए उनके सिर पर एक चादर भी ओढ़ा दी।

अब्बासी ने एएफपी से बात करते हुए कहा कि मामला तो खत्म हो गया, लेकिन यह महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ बने कानून की असलियत को सबके सामने लाता है। अब्बासी ने कहा, 'कानून का पालन एक सपना भर है, जब हम सांसद ही इस लिंग भेद से अछूते नहीं है, तो क्या कहा जाए।'

 
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दशकों से अपने हक के लिए लड़ रहीं महिलाएं

- फोटो : PTI
गौरतलब है कि पाकिस्तानी महिलाएं दशकों से एक परंपरागत समाज में अपने हकों के लिए लड़ रही हैं। यहां एसिड हमले और ऑनर किलिंग जैसे मसले बड़ी आम बात है। हालांकि पाकिस्तान ने बीते कुछ समय में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई कानून पास किए हैं लेकिन आलोचकों का कहना है कि जब तक ये सही तरीके से लागू नहीं होंगे, इनका असर कम ही पड़ने वााला है।

पिछले साल पंजाब प्रांत में एक बिल पास हुआ था जिसमें हिंसा की परिभाषा में हर उस जुर्म को शामिल किया गया जो औरतों के खिलाफ किया जाता है, लेकिन कुछ इस्लामिक संस्थाओं ने इसका यह कहकर विरोध किया कि पुरुषों को अपनी पत्नियों को 'हल्के हाथ' से पीटने की अनुमति दी जानी चाहिए। 
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