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'पाकिस्तानी जवानों ने मुझे मारने की कोशिश की क्योंकि मैंने हवा से उनपर गोलीबारी की थी': नचिकेता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Fri, 01 Mar 2019 12:59 PM IST
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पायलट कंबमपति नचिकेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : फाइल फोटो

भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की आज भारत वापसी होगी। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय पायलट को पाकिस्तान ने ऐसे पकड़ा हो। इससे पहले भी पाकिस्तान कई बार ऐसी हरकत कर चुका है। पाकिस्तान ने 1999 में कारगिल युद्ध के बहादुर जवान कंबमपति नचिकेता को भी इसी तरह पकड़ा था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नचिकेता ने अभिनंदन की कुशल वापसी की कामना की। नचिकेता को पाकिस्तान ने आठ दिनों बाद रिहा किया था।



वह कारगिल युद्ध के अकेले ऐसे युद्धबंदि थे, जिन्हें पाकिस्तान ने पकड़ा था। वह उस वक्त 26 साल के थे और भारतीय वायुसेना में ग्रुप कैप्टन फाइटर जेट के पायलट थे। नचिकेता ने अभिनंदन के बारे में कहा, "वह दो दिनों से एक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। मैं खुश हूं कि वह वापस आ रहे हैं और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए फिर से आसमान में उड़ान भरेंगे।"


हैदराबाद में रहने वाले नचिकेता भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन के पद से 2017 में सेवानिवृत हुए थे। वह फिलहाल कमर्शियल पायलट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शत्रुता की स्थिति में अभिनंदन को युद्धबंदी बनाया गया। सरकार और वायुसेना को सीमा पार अपने समकक्षों के साथ संपर्क में रहना होगा, ताकि अधिकारी की शीघ्र वापसी हो सके। सभी भारतीयों की तरह इस कठिन समय में मेरी दुआएं अभिनंदन के परिवार के साथ हैं और उनकी वापसी का इंतजार है।


अभिनंदन एक बहादुर पायलट हैं, जो वायु सैनिक के तौर पर काफी पेशेवर अंदाज रखते हैं, हमें उन पर गर्व है। उन्होंने वही किया जो कोई भी अपनी ड्यूटी निभाते वक्त करता। उन्हें काफी मुश्किल हालात में बंदी बनाया गया, जब वे अपनी ड्यूटी कर रहे थे।


नचिकेता ने अपने साथ हुए घटनाक्रम के बारे में बताते हुए कहा, "जिस मिग-27 को मैं उड़ा रहा था वो पाक अधिकृत कश्मीर के स्कार्दू में 1999 में क्रैश हो गया। जिन पाकिस्तानी जवानों ने मुझे पकड़ा, उन्होंने मेरे साथ मारपीट की और मुझे मारने की भी कोशिश की क्योंकि मैं हवा से उनकी लोकेशन पर गोलीबारी कर रहा था। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अफसर मौके पर आए, स्थिति को अच्छे से संभाला, और जवानों को नियंत्रित किया। वो मुझे वहां से ले गए। प्रताड़ित होने के बावजूद भी, भारतीय वायुसेना में मिली मेरी ट्रेनिंग ने मुझे चुप रहने में मदद की।"

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