चुनाव सिर पर होने के बावजूद महज एक पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान से बातचीत का साहस दिखाया था। वह भी तब, जब 1999 में शांति कायम करने बस से लाहौर जाने के बाद उसी साल उन्हें कारगिल युद्ध झेलना पड़ा और 2001 में संसद पर आतंकी हमला हुआ। कारगिल के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ आगरा आए। जबकि चुनावी साल 2004 के जनवरी महीने में वाजपेयी रिश्ते सुधारने इस्लामाबाद गए।
आतंकवाद के सवाल पर भारत-पाक के बीच संवाद की संभावना बनती बिगड़ती रही। वर्ष 2008 में काबुल में भारतीय दूतावास पर हमले और उसी वर्ष मुंबई आतंकी हमले के बाद भी तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रिश्ते सुधारने की कोशिश की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन 2013 में जवान हेमराज और सुधाकर की नृशंस हत्या के कारण वार्ता टूट गई। मोदी सरकार के कार्यकाल में पठानकोट, उड़ी हमलों ने सरकार का जायका बिगाड़ कर रख दिया।