भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, पहलगाम हमले को लेकर पाकिस्तान की पोल तभी खुल गई थी, जब उसने यूएन की सुरक्षा परिषद में द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) का नाम लेने से रोक दिया था। भारत ने टीआरएफ का नाम लेकर जब निंदा प्रस्ताव की पहल की तो पाकिस्तान ने इसका पुरजोर विरोध किया। पाकिस्तान ने निंदा प्रस्ताव से टीआरएफ का नाम निकलवा ही दिया। आखिर, पाकिस्तान जम्मू कश्मीर के आतंकी संगठन 'टीआरएफ' का बचाव क्यों कर रहा है। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान ने 2019 में आर्थिक चोट से बचने और 'ग्रे' सूची से बाहर आने के लिए जम्मू कश्मीर में 'लश्कर' के मुखौटे के तौर पर 'टीआरएफ' को खड़ा किया था। बाद में इस आतंकी संगठन ने पाकिस्तानी आईएसआई और 'लश्कर-ए-तैयबा' चीफ हाफिज सईद के इशारे पर जम्मू कश्मीर में कई बड़े हमलों को अंजाम दिया है।
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2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला गया
आतंकी गतिविधियों के चलते पाकिस्तान को 2018 में 'फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे सूची में डाल दिया गया था। इससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक मदद मिलना मुश्किल हो गया। पड़ोसी मुल्क की स्थिति खराब होने लगी। भारत ने यूएन में सबूतों सहित वह प्रस्ताव रखा, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान, आतंकियों का समर्थन करता है। 'ग्रे' सूची से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन टीआरएफ को खड़ा कर दिया। इतना ही नहीं, पाकिस्तान में मौजूद दूसरे आतंकी संगठनों की भी जम्मू कश्मीर में प्रॉक्सी विंग स्थापित की गई। इसका मकसद पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय जनमत को यह बताना था कि जम्मू कश्मीर में जो आतंकी हमले हो रहे हैं, उनमें अब पाकिस्तान का हाथ नहीं है। वहां पर जो भी संगठन हैं, वे लोकल हैं। नतीजा, चार साल बाद अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को 'ग्रे' लिस्ट से बाहर कर दिया गया। अब भारत, उसे दोबारा से ग्रे सूची में शामिल कराने का प्रयास कर रहा है।