पाकिस्तान 2021 से यह दावा करता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में नहीं है और वह अफगानिस्तान भाग गया है। उसी साल एफआईए ने उस पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया था। अब पांच साल बाद यह रकम बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दी गई है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के पिछले छह महीने के तकनीकी विश्लेषण में सामने आया है कि मसूद अजहर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में छिपा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक इसी वजह से पाकिस्तान की नई सूची में उसका नाम डालने को अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
26/11 हमले के कितने आरोपियों के नाम सूची में हैं?
-
एफआईए की नई रेड बुक में मुंबई के 26/11 आतंकी हमलों से जुड़े 19 आतंकियों के नाम भी हैं। इन लोगों पर हमले के लिए आतंकियों की मदद करने, उन्हें पैसा देने या हमले में इस्तेमाल नौकाओं का इंतजाम करने के आरोप हैं। इनमें से 17 लोगों की तस्वीर, उनकी भूमिका और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ाव भी सूची में दिया गया है।
-
दो लोगों के मामले में तस्वीर, संगठन से जुड़ाव और विस्तृत भूमिका हटा दी गई है। इनमें तुरबत के मुहम्मद खान का नाम है, जिसने हमलावरों को मुंबई पहुंचाने के लिए अल-हुसैनी नाव उपलब्ध कराई थी। बहावलनगर के अब्दुल रहमान की तस्वीर और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ाव भी नई सूची से हटा दिया गया है।
26/11 में समुद्री रास्ते से मदद करने वालों में कौन शामिल हैं?
नई सूची में 11 लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों के नाम हैं, जिन्होंने हमलावरों को अल-हुसैनी और अल-फौज नावों के जरिए समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचाने में मदद की थी। इनमें मुल्तान के मुहम्मद अमजद खान, बहावलपुर के शाहिद गफूर, साहीवाल के मोहम्मद उस्मान, लाहौर के अतीक-उर-रहमान, हाफिजाबाद के रियाज अहमद, गुजरांवाला के मुहम्मद मुश्ताक, डेरा गाजी खान के मुहम्मद नईम, कराची के अब्दुल शकूर, मुल्तान के मुहम्मद साबिर सल्फी, लोधरान के मुहम्मद उस्मान और रहीम यार खान के शकील अहमद शामिल हैं। सूची में छह ऐसे आतंकियों के नाम भी हैं, जिन्होंने हमले के लिए आर्थिक मदद दी थी। इनमें मुहम्मद इफ्तिखार अली ने वीओआईपी कनेक्शन के लिए 70 हजार पाकिस्तानी रुपये दिए थे। अन्य आरोपियों पर 80 हजार रुपये से लेकर 21 लाख रुपये तक देने का आरोप है।
क्या ये 26/11 के आरोपी अब भी पाकिस्तान में हैं?
एफआईए के मुताबिक 26/11 हमले से जुड़े सभी 17 आरोपी 18 वर्षों से फरार हैं। हालांकि, दिए गए सूत्रों के मुताबिक भारतीय खुफिया एजेंसियों का कहना है कि ये सभी 17 लोग अब भी पाकिस्तान में मौजूद हैं।
इसी आधार पर सूत्रों ने एफआईए की सबसे वांछित सूची में इनके नाम शामिल करने को अंतरराष्ट्रीय निगरानी को भटकाने वाला कदम बताया है। यानी पाकिस्तान ने इन्हें वांछित घोषित तो किया है, लेकिन सवाल कार्रवाई को लेकर है।
पिछले पांच वर्षों में पाकिस्तान की रेड बुक में सबसे वांछित आतंकियों की संख्या भी 35 प्रतिशत बढ़ी है। 2021 में यह संख्या 1,330 थी, जो अब बढ़कर 1,804 हो गई है।
ऑपरेशन सिंदूर में जैश के बहावलपुर ठिकाने का क्या हुआ?
भारत की ओर से किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य ठिकाने मार्कज सुब्हानल्लाह को भी निशाना बनाया गया था। भारतीय सशस्त्र बलों के मुताबिक यह ठिकाना पाकिस्तान के भीतर करीब 100 किलोमीटर अंदर स्थित था और हमले में इसे नष्ट कर दिया गया। यह केंद्र 2015 से सक्रिय था और जैश के प्रशिक्षण तथा वैचारिक तैयारियों का प्रमुख ठिकाना माना जाता था। यह संगठन की गतिविधियों का संचालन केंद्र भी था और 14 फरवरी 2019 के पुलवामा हमले से जुड़ी आतंकी योजना के संदर्भ में इसका नाम सामने आया है।
मसूद अजहर के परिवार और संगठन से इस ठिकाने का क्या संबंध था?
मार्कज सुब्हानल्लाह परिसर में जैश प्रमुख मसूद अजहर, संगठन के वास्तविक प्रमुख मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर, मौलाना अम्मार और मसूद अजहर के परिवार के अन्य सदस्यों के रहने की जगहें बताई गई हैं। मसूद अजहर ने इसी परिसर से कई बार संबोधन किए थे। दी गई जानकारी के अनुसार इन भाषणों में भारत विरोधी बातें और युवाओं से इस्लामी जिहाद में शामिल होने की अपील की जाती थी। यहां जैश के कैडरों को हथियार चलाने, शारीरिक गतिविधियों और धार्मिक प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी थी। ऐसे में मसूद अजहर का नाम पाकिस्तान की नई वांछित सूची में शामिल होना और उसके खिलाफ इनाम बढ़ाया जाना कई सवाल खड़े करता है। खासकर तब, जब एफएटीएफ की बैठक से पहले पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई दिखाने की जरूरत है।