अंतरराष्ट्रीय अदालत, हेग
- फोटो : PTI
भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव मामले में में अंतरराष्ट्रीय अदालत ने बुधवार को पाकिस्तान को वियना कन्वेंशन के तहत भारत को जाधव तक कॉन्सुलर एक्सेस मुहैया कराने और फांसी की सजा की समीक्षा का आदेश दिया है। आईसीजे ने कहा, कोर्ट ने इस बात पर संज्ञान लिया है कि पाकिस्तान ने वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 36 का उल्लंघन किया है। उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रावधानों का पालन करना चाहिए। पाकिस्तान ने अपनी दलील में भारत व पाक के बीच 2008 में काउंसलर पहुंच देने के मुद्दे पर एक समझौता किया था। मगर हमने परीक्षण में पाया कि पाक ने इस समझौते के उलट व्यवहार किया।
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पाकिस्तान का कहना है कि जासूसी के मामले में वियना कन्वेंशन का यह प्रावधान लागू नहीं होता है। जबकि आर्टिकल 36 के व्यापक संदर्भों में देखें तो काउंसलर पहुंच तो देनी ही चाहिए। पाकिस्तान ने जाधव को उनके अधिकारों के बारे में नहीं बताया जो कि वियना संधि का घोर हनन है। इसके अलावा वियना संधि के मुताबिक पाक को भारत को फौरन गिरफ्तारी की सूचना देनी चाहिए थी। पाक को मानवाधिकार कानूनों के तहत भी जाधव को उनका हक देना चाहिए था। जाधव के मामले में मानवाधिकार कानूनों का भी उल्लंघन किया गया।
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आईसीजे ने पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा, यह अंतरराष्ट्रीय कानून का सिद्धांत है कि किसी भी मामले में पुनर्विचार होना ही चाहिए। नियमों के पालन करने में प्रतिशोध जैसी बात नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान को जाधव की सजा पर पुनर्विचार और समीक्षा करनी चाहिए। पाकिस्तान की सैन्य अदालत का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नियमों का उल्लंघन है।