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जाधव मामलाः ICJ में सुनवाई जल्दी शुरू होने से पाकिस्तान को हो रहा है ये नुकसान

Sat, 13 May 2017 04:25 PM IST
amarujala.com - Presented By: श्रवण शुक्ला
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कुलभूषण जाधव (फाइल फोटो)
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पाकिस्तान ने भारतीय कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा दिए जाने के मामले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की नहीं सुनने की पूरी तैयारी कर ली है। दरअसल, पाकिस्तान इस पूरे मामले को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताने की तैयारी कर चुका है। हालांकि उसके पास इस मामले में अपना पक्ष रखने का समय कम ही है। इस मामले की सुनवाई 15 मई से होनी है, जिसकी काट की पूरी तैयारी में पाकिस्तान लगा हुआ है।
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पाकिस्तान कुलभूषण के मामले को देश की सुरक्षा के मामले के तौर पर सामने रखने की कोशिश में है। साथ ही वो उस केस का रेफरेंस भी देगा, जिसमें भारत-पाक के बीच नौसेना के विमान को मार गिराए जाने के बाद भारत ने अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की नहीं सुनी थी। इस पूरे मामले में कॉमनवेल्थ का सदस्य होने का भी फायदा उठाने की तैयारी पाक कर रहा है। फिर भी समय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को देखते हुए उसके लिए ये थोड़ा मुश्किल लग रहा है। हालांकि वो पूरी तरह से पाक का पक्ष रख सकें, इसकी तैयारी कर रहे हैं।
 
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पहले भारत भी ICJ को कर चुका है दरकिनार

कुलभूषण जाधव को मौत की सजा
पाकिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ इस केस को कॉमनवेल्थ देशों के मामलों के तौर पर भी रखने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें भारत ने साल 1974 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में ये बात रखी थी कि कॉमनवेल्थ देशों के मामलों की सुनवाई अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में नहीं हो सकती। ये उसके अधिकार क्षेत्र के बाहर का मामला है। जिसे 16 सदस्यीय अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की पीठ ने माना भी था। इसी मामले का रेफरेंस देते हुए भारत साल 1999 में पाकिस्तानी नेवी के मार गिराने वाले मामले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के दखल को दरकिनार कर चुका है। हालांकि मानवाधिकार के मामले से जुड़े होने की वजह से अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय इस मामले में सुनवाई कर भी सकता है।

पाकिस्तान में न्यायिक मामलों के वरिष्ठ जानकार और साल 2005-2009 तक अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश रह चुके अली नवाज चौहान ने भी इस तथ्य को स्वीकारा है। उन्होंने पाकिस्तानी अखबार डॉन से बातचीत में कहा कि कॉमनवेल्थ देशों के मामलों की सुनवाई अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में नहीं होती। हालांकि ये मानवाधिकार से जुड़ा मामला है, इसलिए ये अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में भी आ जाता है। 

गौरतलब है कि भारत ने इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में मानवाधिकार के तहत ही उठाया है। साथ ही कुलभूषण जाधव को कॉउंसलर एक्सेस न देने की वजह से विएना कंवेंशन 1963 का उल्लंघन भी बताया है। जिसमें किसी भी व्यक्ति को उसके देश के साथ कॉउंसलर एक्सेस दी जाती है। यही वजह है कि इस मामले में भारत का पक्ष मजबूत नजर आ रहा है। इस मामले की सुनवाई 15 मई से होगी, जिसमें जाधव की फांसी पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने रोक लगाई हुई है।
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