पाकिस्तान की बेबसी अब साफ दिखने लगी है। वह भारतीय सीमा पर एक और दुस्साहसिक हमले की फिराक में है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाने की योजना बना रहा है। इस साजिश का असली मकसद अमेरिका को इस विवाद के बीच में खींचना है।
ऑपरेशन सिंदूर जैसी जवाबी कार्रवाई की उम्मीद
पाकिस्तान इस बार किसी बहुत बड़े हमले की फिराक में है। उसे उम्मीद है कि इस हमले के बाद भारत वैसी ही कड़ी प्रतिक्रिया देगा, जैसी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दी गई थी। पाकिस्तान के सैन्य हुक्मरानों को लगता है कि भारत के जवाबी हमले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोर मचेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जरिए अमेरिका के साथ अपने नए रिश्तों के दम पर पाकिस्तान को बाहरी हस्तक्षेप की पूरी उम्मीद है।
कश्मीर मुद्दे के अंतरराष्ट्रीयकरण का पुराना एजेंडा
न्यूज एजेंसी आईएएनएस को एक एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान केवल सैन्य कार्रवाई का जवाब नहीं चाहता। उसका असली मकसद कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाना है। यह उसकी पुरानी और सोची-समझी रणनीति है। भारत ने हमेशा साफ किया है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भी पाकिस्तान ने दुनिया के सामने रोना रोया था, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया कि यह कदम केवल राज्य को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए था।
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फील्ड मार्शल मुनीर की दांव पर लगी साख
पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के लिए इस वक्त काफी कुछ दांव पर लगा है। मुनीर ने पहले अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने की कोशिश की थी। वह कोशिश नाकाम रही। अब मुनीर का पूरा ध्यान फिर से भारत की ओर मुड़ गया है। अधिकारी के मुताबिक, मुनीर पर घरेलू दबाव बहुत ज्यादा है। अपनी छवि सुधारने के लिए उन्हें भारत में किसी बड़ी घटना को अंजाम देना जरूरी लग रहा है।
राष्ट्रपति बनने की निजी महात्वाकांक्षा
सूत्रों का कहना है कि मुनीर पाकिस्तान का राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ कर रहे हैं। हालांकि वे सेना के जोर पर यह पद पा सकते हैं, लेकिन वे दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि उन्होंने इसे कमाया है। कश्मीर मुद्दे को हवा देकर वे खुद को पाकिस्तान के रक्षक के तौर पर पेश करना चाहते हैं।
आतंक का दो तरफा जाल
इंटेलिजेंस ब्यूरो के अनुसार, मुनीर ने दोहरी रणनीति बनाई है। पाकिस्तान अब 'होम-ग्रोन मॉड्यूल्स' यानी स्थानीय आतंकियों पर जोर दे रहा है। पहला मकसद घाटी के पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचाना है। दूसरा मकसद सुरक्षा बलों का ध्यान सीमा से हटाकर आंतरिक इलाकों में लगाना है। जैसे ही सुरक्षा बलों का ध्यान भटकेगा, पाकिस्तान सीमा पार लॉन्च पैड्स पर तैयार बैठे आतंकियों को अंदर भेजने की कोशिश करेगा। मुनीर का यह खेल बहुत बड़ा है। वह अपने देश के आतंकी बुनियादी ढांचे पर भारतीय हमले झेलने को भी तैयार है, बशर्ते अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसमें हस्तक्षेप करे। ईरान वार्ता में विफलता के बाद अब कश्मीर ही मुनीर का आखिरी कार्ड बचा है।