ग्लोबल कंपटेटिव इंडेक्स के 2016-2017 के आंकलन के मुताबिक 139 देशों की विश्व प्रतिस्पर्धा सूची में भारत 16 पायदान ऊपर चढ़कर 39वें स्थान पर पहुंच गया है। 2016-17 की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्थिति माल बाजार, दक्षता, और व्यापार के तौर-तरीकों, के क्षेत्र में अन्य देशों के मुकाबले बेहतर हुई है।
इसके अलावा फिस्कल पॉलिसी, मॉनिटरिंग और तेल की कीमतों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्थता में स्थिरता बनी हुई है। जी-20 देशों में भारत सबसे तेज तरक्की करने वाला देश बन गया है। रैंकिंग में 28वें स्थान पर मौजूद चीन ब्रिक्स देशों में टॉप पर है। डब्ल्यूईएफ ने इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा की इस तरह की सूची की शुरुआत 2005 में शुरू की थी।
इस सूची में पाकिस्तान 122वें नंबर पर है। इस रैंकिग से वो अपने पड़ोसी मुल्कों की अपेक्षा आखिरी पायदान पर पहुंच गया है। वहीं फोरम की इस रैंकिंग में भारत 39 वें नंबर है। इसके अलावा श्रीलंका 71वें, भूटान 97वें, नेपाल 98वें, बांग्लादेश 106 पायदान पर है।
इन आधारोंं पर हुआ आंकलन
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने अपनी ये रिपोर्ट देशों की उत्पादकता का स्तर निर्धारित करने वाले कारकों में देश की नीतियों, उनके संस्थानों के आधार पर जारी की है। जिसमें 12 श्रेणियां शामिल की गई हैं। ये श्रेणियां संस्थान, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण, व्यापक आर्थिक वातावरण, स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण, माल बाजार दक्षता, श्रम बाजार दक्षता, वित्तीय बाजार का विकास, तकनीकी तत्परता, बाजार का आकार, व्यापार परिष्कार, और नवाचार शामिल हैं।
इस सूची में शुरूआती पचास देशों में से अधिकतर ने अपना स्थान गंवाया है। वहीं दूसरी ओर शुरुआती दस सूचकांकों वाले देश पिछले साल की रिपोर्ट के मुताबिक अपनी रैंकिंग में बने हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने आर्थिक पहलू पर वापसी की है। पाकिस्तान 2015-16 में 119 नंबर से 2016-17 में 111वें नंबर पर आ गया है। जबकि यहां इंफ्रास्ट्रक्चर इस साल सिर्फ एक ही पहलू पर बेतहर हुआ है। भ्रष्टाचार, अपराध और चोरी, कर की दरों, निवेश की पहुंच और सरकार अस्थिरता और तख्तापलट जैसे बिंदू पाकिस्तान के साथ व्यवसाय करने में परेशानी पैदा कर रहे हैं। रिपोर्ट यह भी इशारा करती है अर्थव्यवस्थाओं के ज्यादा खुलेपन ने अन्य देशों को निवेश का मौका तो दिया है, लेकिन इससे उनके देशों के बढ़ने और कुछ नया करने की संभावनाओं में कमी आई है।