अमेरिकी ड्रोन हमले में तालिबानी नेता मुल्ला मंसूर और ड्राइवर का शरीर बुरी तरह झुलस गया। मिसाइल के इस 100 फीसदी सटीक निशाने में गाड़ी क्षत विक्षत हो गई। लेकिन पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसी को मंसूर के पास से उसका यात्रा दस्तावेज सही सलामत मिल गया। भारतीय खुफिया एजेंसियों और अफगानिस्तान की एजेंसी नेशनल डायरेक्टोरेट ऑफ सिक्योरिटी (एनडीएस) को यह बात हजम नहीं हो रही है। इन एजेंसियों के मुताबिक मंसूर का यात्रा दस्तावेज मिलना बड़ी साजिश का अहम हिस्सा है।
इन एजेंसियों को मिली खुफिया जानकारी के मुताबिक मंसूर की बलूचिस्तान में मौजूदगी की खबर पाकिस्तान को बखूबी थी। इतना ही नहीं पाकिस्तानी एजेंसी के चुनिंदा उच्चपदस्थ अधिकारियों को अमेरिका के पूरे ऑपरेशन की जानकारी भी थी। मामले से जुड़े भारतीय एजेंसी के शीर्षस्थ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि धमाके की गरमी से शरीर और गाड़ी बुरी तरह जल जाए और कागज सही सलामत निकले यह संभव नहीं। सूत्रों के मुताबिक इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तानी एजेंसी हमले के तुरंत बाद वह यात्रा दस्तावेज गाड़ी में डाल कर उनके नकली पहचान को सुनिश्चत करना चाहती है। ताकि वह इस मामले में अपनी अनभिज्ञता साबित कर सके। यह तभी संभव है जब उसे मंसूद की मौजूदगी और उसपर होने वाले ड्रोन हमले की जानकारी उसे पहले से हो। मंसूर की गाड़ी तक पहुंचने वाला पहला शख्स पाकिस्तानी एजेंसी से ही था।
इसके पीछे की साजिश की पड़ताल के लिए पिछले हफ्ते राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत दोभाल, रॉ प्रमुख राजेन्द्र खन्ना और आईबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा के बीच अहम बैठक हुई है। अफगानी एजेंसी एनडीएस से भी जानकारियां साझा की जा रही है। गौरतलब है कि ड्रोन हमले केकुछ ही देर बाद पाकिस्तान ने पूरे मामले पर हैरानी जताते हुए कहा कि मंसूर की गाड़ी से मोहम्मद वाली नाम से यात्रा दस्तावेज मिले हैं। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि वाली के नाम से यात्रा कर रहा मंसूर एक रात पहले ही ईरान की सीमा से पाकिस्तान में प्रवेश किया था। सूत्रों के मुताबिक शुरु में अफगानिस्तान, ईरान और भारत समेत सभी को यह शक था कि हमले में मारा गया मंसूर है या कोई और। पाकिस्तान ने ही इसकी पहली तसदीक की थी।