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Terror: कश्मीर ही नहीं काबुल, मॉस्को से लंदन तक आतंकी हमले... सबमें पाकिस्तानी हाथ; इस सरजमीं पर आतंक के स्कूल

Thu, 01 May 2025 02:19 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : freepic
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पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंकवाद को प्रायोजित करने, आतंकियों को पनाह देने और उन्हें दुनियाभर में भेजने में पाकिस्तान का ट्रैक रिकॉर्ड फिर से दुनिया के सामने आ गया है। दशकों से पाकिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल सीमापार आतंकवाद, चरमपंथी विचारधारा के लिए लॉन्चपैड के लिए किया जाता रहा है। कश्मीर से काबुल, मॉस्को से लंदन तक आतंकी हमलों में पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क का खुलासा होता रहा है। भारत की ओर तैयार किए डोजियर में दुनियाभर की आतंकी हमलों का जिक्र किया गया है। इसमें पाकिस्तानी नेताओं के बयानों को भी शामिल किया गया है।

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2018 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने संकेतों में कहा था कि 2008 के मुंबई हमलों में पाकिस्तान सरकार की भी भूमिका हो सकती है। लश्कर-ए-ताइबा के आतंकियों की ओर से अंजाम दिए गए इस हमले में पाकिस्तान का हाथ सामने आया था। अजमल कसाब जिंदा न पकड़ा जाता तो शायद पाकिस्तान इसे भी झुठला देता। पूर्व पाकिस्तानी सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने भी स्वीकार किया था कि सेना ने जम्मू-कश्मीर में भारत से लड़ने के लिए आतंकवादी समूहों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने माना था कि सरकार ने जानबूझकर इसकी अनदेखी की ताकि भारत को वार्ता के लिए मजबूर किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मुद्दा उठाया जा सके। अभी हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने माना कि देश ने तीन दशकों से अधिक समय तक आतंकवादी समूहों का समर्थन किया, जिसे उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व वाले विदेश नीति निर्णयों से जुड़ी एक गलती बताया।
 

काबुल में भी भारतीय दूतावास को बनाया निशाना
अफगानिस्तान में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और सुरक्षित पनाहगाह प्रदान करती रही है। इन समूहों ने अफगान नागरिकों, सरकारी संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय बलों पर कई घातक हमले किए हैं। इनमें 2008 में काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर हमला और 2011 में अमेरिकी दूतावास पर हमला शामिल हैं। वरिष्ठ पत्रकार कार्लोटा गॉल ने अपनी किताब में लिखा कि दूतावास पर बमबारी आईएसआई एजेंट की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अनुमोदित और नियंत्रित की गई कार्रवाई थी।
 

रूस के मॉस्को हमले भी पाक का आया नाम
रूस की राजधानी मॉस्को में 2024 में हुए कॉन्सर्ट हाॅल हमले की जांच में भी पाकिस्तान का संबंध सामने आया है। रूसी अधिकारियों ने मास्टरमाइंड की पहचान ताजिक नागरिक के रूप में की और उसके पाकिस्तानी नेटवर्क से संभावित जुड़ाव की जांच कर रहे हैं। शुरुआती जांच के अनुसार, हमलावरों को रसद या वैचारिक समर्थन पाकिस्तान से मिलने की बात कही जा रही है।

ईरान में पाक संगठन ने किए हमले
पाकिस्तान स्थित सुन्नी आतंकी संगठन जैश-उल-अदल ने कई बार ईरानी सुरक्षाबलों पर हमला किया है। 16 जनवरी 2024 को ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ड्रोन और मिसाइल हमले किए। उसका निशाना जैश-उल-अदल के ठिकाने थे। ईरान अकसर पाकिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि वह इन सुन्नी आतंकियों को शरण देता है और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करता।

ब्रिटेन में पाकिस्तान में प्रशिक्षण प्राप्त आतंकियों ने किया था हमला
7 जुलाई 2005 को लंदन में हुए बम धमाकों को चार ब्रिटिश इस्लामी आतंकियों ने अंजाम दिया था। इनका प्रशिक्षण और ब्रेनवॉश पाकिस्तान में हुआ था। तीन हमलावर मोहम्मद सिद्दीक खान, शहजाद तनवीर और जर्मेन लिंडसे ने 2003 से 2005 के बीच पाकिस्तान में समय गुजारा था।
 

ओसामा बिन लादेन को दी शरण
2011 में अमेरिका ने अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया था। बिन लादेन पाकिस्तान की सैन्य अकादमी के पास वर्षों तक बिना किसी की नजर में आए रहा। इससे आईएसआई की संलिप्तता पर सवाल उठे।
 

जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश को पैसा मुहैया कराया
पाकिस्तान की आईएसआई पर आरोप लगता रहा है कि उसने प्रतिबंधित इस्लामी समूह जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) को धन और प्रशिक्षण दिया। यह गुट 2016 के ढाका के गुलशन कैफे हमले के लिए जिम्मेदार था। इस हमले में 20 बंधक मारे गए थे। 2015 में बांग्लादेश ने पाकिस्तानी राजनयिकों को जेएमबी के लिए धन स्थानांतरित करते हुए रंगे हाथ पकड़ा था और बाद में इन्हें निष्कासित कर दिया गया था। 2020 की खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, आईएसआई ने बांग्लादेश के कॉक्स बाजार शिविरों में 40 रोहिंग्या शरणार्थियों को जेएमबी के जरिए प्रशिक्षण दिलाया ताकि उनकी भारत में घुसपैठ कराई जा सके।
 
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पाकिस्तान की सरजमीं पर आतंक के स्कूल
पाकिस्तान के पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, वजीरिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी प्रशिक्षण शिविर फैले हुए हैं। ये शिविर लश्कर-ए-ताइबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन और आईएसआईएस-खोरासान जैसे समूहों द्वारा संचालित होते हैं। ये शिविर कट्टरपंथी बनाने, हथियारों का प्रशिक्षण देने और आत्मघाती हमलों की तैयारी के लिए जाने जाते हैं। कई बार पूर्व पाकिस्तानी सैनिक व अधिकारी भी इन प्रशिक्षणों में मदद करते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की आतंकवाद पर देश रिपोर्ट 2019 ने पाकिस्तान को एक ऐसे देश के रूप में पहचाना है, जो कुछ क्षेत्रीय रूप से केंद्रित आतंकवादी समूहों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह के रूप में काम करता रहा है। पाकिस्तान सेना और आतंकवाद : एक अपवित्र गठबंधन नामक एक रिपोर्ट में, यूरोपीय फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज ने पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान, इसकी खुफिया एजेंसी--आईएसआई--और कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं के बीच एक गहरे संबंध को उजागर किया है।
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