पकिस्तान में इमरान सरकार बनने पर लोगों को उम्मीद जगी थी की अब सेना के साये से निकलकर वहां की सरकार भारत से संबंध सुधारने के प्रयास करेगी। मगर इन उम्मीदों पर पानी फेरते हुए पकिस्तान के विदेश मामलों के मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ऑल पार्टी हुर्रियत के नेता मीरवाइज फारूक से फोन पर बात की है। इस बातचीत को पकिस्तान के कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन को प्रोपगेंडा से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह पहली बार है जब पकिस्तान की इमरान सरकार ने पुराने ढर्रे पर लौटते हुए हुर्रियत संपर्क साधा है। बातचीत में कुरैशी ने मीरवाइज को कश्मीर के मुद्दे को उठाने के लिए लंदन में 4-5 फरवरी को आयोजित हो रहे आयोजन की भी जानकारी दी। भारत की मोदी सरकार ने हुर्रियत से बातचीत से इंकार करते हुए पिछले चार साल में कई बार पकिस्तान से बातचीत रद्द की है।
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में मीरवाइज ने कहा कि कुरैशी से कश्मीर मुद्दे को विश्व मंच पर उठाने की हुई। उन्होंने कश्मीर के हालात को लेकर चिंता जाहिर की। सबसे बड़ी बात उन्होंने बताया कि किस तरह इमरान खान ने भारत सरकार से बात करने की कोशिश की मगर कोई जवाब नहीं मिला। अब वह चुनाव के बाद नई सरकार से बात करेंगे।
मीरवाइज के मुताबिक कुरैशी ने कहा कि हम चाहते हैं कि बातचीत से सारे मसलें हल हो मगर भारत सरकार से जवाब नहीं मिल रहा। पकिस्तान के विदेश मंत्री की इस बातचीत को उसके एजेंडा का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें वह भारत के बातचीत न करने की छवि बनाने की कोशिश कर रहा है।
भारत के विदेश मंत्रालय से इस पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं मिली लेकिन कुरैशी की इस पहल से भारत नाराज है जिसने कहा कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा है और किसी तीसरे पक्ष के लिए कोई स्थान नहीं है।
अपना घर संभाले पाकिस्तान
भारत में सूत्रों ने कहा कि पकिस्तान लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है। नई सरकार के हथकंडे इस बात को नहीं छुपा सकते कि उसके हाथ भारतीयों के खून से सने हैं। कश्मीर और पाक अधिकृत कश्मीर के हालात के लिए भी पकिस्तान ही जिम्मेदार है। पकिस्तान को अपनी सरजमीं पर हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में सोचना चाहिए, खासकर अल्पसंख्यकों के अधिकारों के बारे में। पश्तून, अहमदिया, सिख, हिंदू और बलोच के साथ होने वाला दोहरा रवैया बंद होना चाहिए। भारत के लोग हर तरह की नफरत और हिंसा का जवाब देंगे।
मीरवाइज के पास नहीं है पासपोर्ट
मीरवाइज ने कहा कि वह कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए लंदन में होने वाले कार्यक्रम में भाग लेने जरूर जाना चाहेंगे मगर मेरे पास विदेश जाने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। 2012 में मेरे जेनेवा दौरे के बाद मेरा पासपोर्ट रिन्यू नहीं किया गया। बस मुझे पिछले साल उमरा के लिए सऊदी अरब जाने की इजाजत मिली थी।