आतंकी फंडिंग और मनी लांड्रिंग पर शिकंजा कसने में नाकामी के चलते ब्लैक लिस्ट में शामिल होने के कगार पर खड़े पाकिस्तान ने खुद को बचाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी के तहत पाकिस्तानी विशेषज्ञों का 20 सदस्यीय दल आतंकी फंडिंग पर पूरे विश्व में नजर रखने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) को मनाने के लिए बैंकॉक पहुंचा है।
पाकिस्तान आंतकी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अन्य आतंकियों का समर्थन करने के कारण एफएटीएफ के रडार पर है। इसके अलावा, हाफिज सईद जैसे आतंकवादी नियमित रूप से भारत विरोधी बयानबाजी करते हुए डोनेशन एकत्रित कर रहे हैं। 22 अगस्त को एशिया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) ने पाकिस्तान को मानदंड पूरा ना कर पाने के कारण ब्लैक लिस्ट में भी डाल दिया था।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी दल का नेतृत्व आर्थिक मामलों के मंत्री हम्माद अजहर कर रहे हैं, जबकि इसमें फेडरल इंवेस्टीगेशन एजेंसी, स्टेट बैंक, फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ऑफ पाकिस्तान, एंटी नारकोटिक्स फोर्स और इंटेलिजेंस एजेंसी के अधिकारी शामिल किए गए हैं।
पाकिस्तान ने गिलगित बाल्टिस्तान में स्थित स्कर्दू हवाई अड्डे पर अपने जेएफ-17 युद्ध विमानों को तैनात कर दिया है। यह हवाई अड्डा लद्दाख के नजदीक है। भारतीय खुफिया एजेंसियां पाकिस्तानी सेना की इन गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, तनाव के बीच पाकिस्तानी सेना लद्दाख के नजदीक स्थित अपनी अग्रिम चौकियों पर भारी हथियार और सैन्य साजो-सामान को एकत्रित कर रही है। शनिवार को पाकिस्तानी वायुसेना के तीन सी-130 हरक्यूलस परिवहन विमानों ने सैन्य साजो-सामान को गिलगित बाल्टिस्तान में स्कर्दू हवाई अड्डे पर पहुंचाया।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने अग्रिम मोर्चे पर जो साजो-सामानों पहुंचाया है उसका उपयोग युद्ध के दौरान लड़ाकू विमानों की सहायता के लिए किया जाता है।
परमाणु युद्ध की खोखली धमकी देने के बाद अब पाकिस्तान ने नई पैंतरेबाजी करते हुए सीमा से सटे बाघ और कोटली सेक्टर में 2000 से ज्यादा सैनिकों को तैनात किया है। यह स्थान नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित है।
भारतीय सेना के सूत्रों ने जानकारी देते हुए बताया कि इन सैनिकों को बैरकों से निकालकर एलओसी के 30 किलोमीटर के दायरे में तैनात किया गया है। भारतीय सेना पाकिस्तान के इस मूवमेंट पर करीब से नजर रखे हुए है। पाक ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब उसके आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने स्थानीय और अफगानों की बड़े पैमाने पर भर्ती करनी शुरू कर दी है।